
जहां-जहां चुनाव, वहां-वहां तनाव... महज इत्तेफाक या सियासी दांव!
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मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने का विरोध करने के बहाने सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की शुरुआत कर्नाटक से हुई और फिर महाराष्ट्र में लाउडस्पीकर को लेकर अजान बनाम हनुमान चलीसा का मुद्दा गर्मा गया है और बात हलाल तक पहुंच गई. धीरे-धीरे सांप्रदायिक तनाव की यह आग देश के उन तमाम राज्यों में भी फैलने लगी, जहां इस साल आखिर या फिर अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.
'इस बार दंगा बहुत बड़ा था, खूब हुई थी ख़ून की बारिश, अगले साल अच्छी होगी फसल मतदान की' भारतीय राजनीतिक व्यवस्था पर कटाक्ष करती ये पंक्तियां लिखी तो दशकों पहले गई थीं लेकिन आज भी देश में यहां-वहां हो रहीं सांप्रदायिक घटनाओं पर सबसे सटीक टिप्पणी लगती हैं.
साल 2022 की शुरुआत हुई तो देश कोविड की दूसरी लहर को परास्त और तीसरी लहर को बेदम कर यूपी सहित पांच राज्यों की चुनावी तैयारियां में व्यस्त था. चुनाव हुए, नतीजे आए और अलग-अलग राज्यों में सरकारों की ताजपोशी भी हो गई. लेकिन जैसा कि कहा जाता है कि हिंदुस्तान में राजनीतिक दल हमेशा चुनावी मोड में रहते हैं. एक जगह चुनाव खत्म होते ही दूसरी जगहों पर मुकाबले की तैयारी शुरू हो जाती है.
अब इसे इत्तेफाक कहा जाए या कोई सियासी साजिश कि जिन-जिन राज्यों में ऐसे चुनावी मुकाबले होने हैं वहां की फिजाओं में सांप्रदायिकता की जहरीली हवा घुलती जा रही है. छोटी-छोटी घटनाएं बड़े सांप्रदायिक तनाव की वजह बन रही हैं. जरा-जरा की बात पर भीड़ सड़क पर उतर आती है और कानून-व्यवस्था उपद्रवियों के रहमोकरम पर पड़ी दिखती है. मीडिया और सोशल मीडिया में ऐसी घटनाओं का ही शोर है और हर रोज किसी नए इलाके से इस तरह की खबरें सामने आ रही हैं, फिर चाहे वो राजस्थान हो, कर्नाटक हो, गुजरात हो या दिल्ली और महाराष्ट्र, जहां या तो विधानसभा चुनाव होने हैं या निगम चुनावों की जोर आजमाइश में पार्टियां लगी हुई हैं.
राजस्थान में शहर-शहर तनाव बना हुआ है
बात राजस्थान की अगर की जाए तो यहां पिछले एक महीने में ही पांच जिलों में सांप्रदायिक तनाव की ऐसी घटनाएं देखी गईं जो राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बनीं. दो अप्रैल को करौली में हिंदू नववर्ष के मौके पर बाइक रैली पर कथित पथराव के बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई. जमकर आगजनी और पथराव के बाद इलाके में कर्फ्यू लगा रहा. इसके बाद 18 अप्रैल को अलवर जिले में बुलडोजर से मंदिर तोड़ने की घटना हुई और 22 अप्रैल को उसका वीडियो सामने आया तो बवाल खड़ा हो गया. 2 मई को जोधपुर में ईद और परशुराम जयंती के मौके पर बवाल हुआ तो 10 मई को भीलवाड़ा में 20 साल के युवक की हत्या के बाद से सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है. 11 मई को हनुमानगढ़ में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के स्थानीय नेता पर हमला हुआ, जिसके बाद वहां भी माहौल गर्माया हुआ है.
राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और अगले साल चुनाव होने वाले हैं. राजस्थान का सियासी मिजाज ऐसा रहा है कि यहां हर पांच साल बाद सरकार बदलती है. यही वजह है कि बीजेपी कमर कसे हुए है. वो गहलोत के राज में हिंदुओं पर अत्याचार के आरोप लगा रही है. पार्टी के तमाम बड़े नेता इन घटनाओं को लेकर सड़क से सोशल मीडिया तक कांग्रेस पर हमलावर हैं. हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इन घटनाओं को बीजेपी के सियासी प्रयोग कहकर विपक्ष को ही कठघरे में खड़ा कर रहे हैं.

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