
जब अफ़ग़ानिस्तान से पाकिस्तान पर स्कड मिसाइलों की हुई थी बारिश
BBC
1989 और 1991 के बीच, अफ़गानिस्तान से दाग़ी गई कई स्कड मिसाइलें लगातार पाकिस्तान में गिरती रहीं. इन मिसाइल हमलों में कई लोगों की जान गई.
सात अप्रैल 1989 की सुबह जिस सोवियत स्कड मिसाइल ने पाकिस्तानी सरहदी इलाक़े तोरख़म में डाकख़ाना तबाह किया, वो काबुल से दाग़ी गई थी.
पाकिस्तान ने इस हमले को अफ़ग़ानिस्तान सरकार के एक स्पष्ट उकसावे वाली कार्रवाई बताया. लेकिन अफ़ग़ानिस्तान ने इसे "दुर्घटना" बताया और इस बारे में माफ़ी मांगने से इनकार कर दिया.
उस वक़्त तक साल 1979 में 'मुजाहिदीन' कहलाने वाले जंगजूओं के ख़िलाफ़ अफ़ग़ान हुकूमत की मदद को आई सोवियत फ़ौज का आख़िरी दस्ता अपने वतन वापस जा चुका था.
लेकिन सोवियत संघ, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और अमेरिका के बीच अप्रैल 1988 के जिनेवा समझौते (जिसके तहत सैनिकों की वापसी शुरू हुई थी) का उल्लंघन जारी रहा.
यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल (यूपीआई) के जेराल्ड नैडलर की 2 नवंबर, 1988 की रिपोर्ट के अनुसार, सोवियत संघ ने घोषणा की कि वह अफ़ग़ानिस्तान को अपने सबसे उन्नत हथियार, जिनमें मध्यम दूरी की मिसाइलें भी शामिल हैं, दे रहा है.
घोषणा के मुताबिक़ ये "उन विद्रोही हमलों का मुक़ाबला करने के लिए किया गया है जिन्हें राष्ट्रपति नजीबुल्लाह की काबुल सरकार ने 'पाकिस्तान समर्थित' बताया है."
नैडलर ने लिखा, "अमेरिका ने इन हथियारों को तरल ईंधन से चलने वाली सतह से सतह पर मार करने वाली स्कड मिसाइलों के रूप में पहचाना, जो पाकिस्तान तक पहुंचने में सक्षम थे. साथ ही पाकिस्तान के लिए अपने निरंतर 'पूर्ण समर्थन' की स्पष्ट रूप से घोषणा भी की."













