
चीन चाइल्डबर्थ को बढ़ावा देने के लिए करेगा ये उपाय, घटते बर्थरेट से चिंता में ड्रैगन
AajTak
चीन अब दोहरी डेमोग्राफिक चुनौती का सामना कर रहा है . जन्म और प्रजनन दर में गिरावट के साथ-साथ बुज़ुर्ग आबादी भी तेज़ी से बढ़ रही है. शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, 2023 के अंत तक, चीन में लगभग 300 मिलियन लोग 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के थे
चीन की स्टेट काउंसिल ने देश में तेजी से घटती जन्म दर के बीच "चाइल्डबर्थ फ्रेंडली सोसायटी" बनाने और चाइल्डबर्थ का समर्थन करने के लिए नए उपाय बताए हैं. शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, ये उपाय प्रसव और बाल देखभाल सेवाओं को मजबूत करने, शिक्षा, आवास और रोजगार में सहायता करने और विवाह और चाइल्डबर्थ के इर्द-गिर्द 'नई संस्कृति' को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं.
चीन के शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि देश में किंडरगार्टन (बालविहार) की संख्या 2023 में 14,808 कम हो गई, जिससे कुल संख्या घटकर 274,400 रह गई. यह लगातार दूसरी वार्षिक गिरावट है, जो चीन की गिरती जन्म दर के बार में बताती है.
2023 में चीन की जनसंख्या लगातार दूसरे वर्ष दो मिलियन से अधिक घटकर 1.4 बिलियन हो गई, जिसमें केवल नौ मिलियन जन्म दर्ज किए गए. 1949 में रिकॉर्ड रखने की शुरुआत के बाद से यह सबसे कम आंकड़ा था.
चीन अब दोहरी डेमोग्राफिक चुनौती का सामना कर रहा है . जन्म और प्रजनन दर में गिरावट के साथ-साथ बुज़ुर्ग आबादी भी तेज़ी से बढ़ रही है. शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, 2023 के अंत तक, चीन में लगभग 300 मिलियन लोग 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के थे, यह आंकड़ा 2035 तक 400 मिलियन से अधिक और 2050 तक 500 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है.
डेमोग्राफिक क्राइसिस का मुख्य कारण दशकों पुरानी एक-बच्चा नीति (One Child Policy) है, जो 2016 में समाप्त हो गई थी. 2021 में, सरकार ने नीति में और बदलाव किया, जिससे परिवारों को तीन बच्चे तक पैदा करने की अनुमति मिल गई.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









