गहने गिरवी रख जुटाए 9000 रुपये, रेस्क्यू तक बचे केवल ₹290... झकझोर देगी उत्तरकाशी सुरंग में फंसे इस मजदूर के पिता की कहानी
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उत्तरकाशी की सिल्क्यारा सुरंग में 17 दिन से चल रही जंग आखिरकार जीत ली गई. यहां 12 नवंबर से 41 मजदूर फंसे हुए थे. मंगलवार शाम को इन सभी मजदूरों को एक-एक कर बाहर निकाला गया. एक मजदूर के पिता ने बेटे के सुरक्षित सुरंग से बाहर आने पर खुशी जताते हुए बताया कि वो गहनों को गिरवी रख अपने बेटे के लिए यहां पहुंचे थे. 9 हजार रुपये लेकर आए थे. रेस्क्यू के अंतिम दिन तक अब जेब में सिर्फ 290 रुपये रह गए हैं.
घर के गहने गिरवी रख डाले ताकि उनसे मिले रुपयों से बेटे के पास उत्तरकाशी पहुंच सकूं... ये अल्फाज़ हैं उस पिता के जिनका बेटा 17 दिनों तक सिल्क्यारा सुरंग में फंसा था. लेकिन अब जब बेटा सुकुशल बाहर आ गया है तो पिता को कोई अफसोस नहीं है कि उनका इस दौरान कितना खर्च हो गया. उन्हें खुशी है कि उनका बेटा सुरक्षित है. दरअसल, यहां 12 नवंबर से 41 मजदूर फंसे हुए थे. मंगलवार शाम को इन सभी मजदूरों को एक-एक कर बाहर निकाला गया.
सभी मजदूर सुरक्षित हैं और चिन्यालीसौड़ के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में इन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है. इन मजदूरों के बाहर आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माला पहनाकर इनका स्वागत किया. वहीं, 17 दिन से अपनों के बाहर आने का इंतजार कर रहे परिजनों की आंखों में खुशी के आंसूं आ गए.
सिलक्यारा टनल में उत्तराखंड के 2, हिमाचल प्रदेश का 1, यूपी के 8, बिहार के 5, पश्चिम बंगाल के 3, असम के 2, झारखंड के 15 और ओडिशा के 5 मजदूर फंसे थे. झारखंड से आए एक शख्स ने बताया कि उनका बेटा भी इस सुरंग में फंसा था. लेकिन अब जब वो बाहर सुरक्षित आ गया है कि तो इससे ज्यादा खुशी की बात उनके लिए क्या हो सकती है?
मजदूर के पिता ने बताया कि उनका एक बड़ा बेटा कुछ साल पहले मुबंई में एक सड़क हादसे में मारा गया था. जिसके बाद बहू अपने गहने उन्हें वापस देकर मायके चली गई थी. सुरंग में जो फंसा था वो उनका छोटा बेटा है. जब उन्हें पता चला कि उनका बेटा उत्तरकाशी में सुरंग में फंस गया है तो उनके होश उड़ गए. पूरा परिवार टेंशन में आ गया. उन्होंने कहा, ''मैंने बिना देर किए बेटे के पास जाने का प्लान बनाया. लेकिन आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण इतने रुपये नहीं थे कि वे झारखंड से उत्तरकाशी जा सकें. फिर मैंने दिवंगत बेटे की पत्नी के उन गहनों को बेच दिया जिन्हें वो छोड़ गई थी. इसके बदले मुझे 9 हजार रुपये मिले. फिर मैंने उत्तरकाशी का टिकट करवाया और सिलक्यारा पहुंच गया.''
'मेरे पास बस 290 रुपये ही बचे हैं'
उन्होंने बताया, ''मैंने जैसे-तैसे इन रुपयों से यहां काम चलाया. बस रोज इंतजार करता था कि कब मेरा बेटा सुरक्षित बाहर आएगा. अब जब बेटा बाहर आ गया है तो मुझे बहुत ही ज्यादा खुशी है. 9 हजार लेकर मैं यहां आया था. अब मेरे पास सिर्फ 290 रुपये बचे हैं. लेकिन मुझे कोई अफसोस नहीं है कि मैंने गहने बेच दिए क्योंकि मेरा बेटा मुझे सुरक्षित वापस मिल गया है. फिलहाल बेटा अस्पताल में है. उसके ठीक होने के बाद हम ऋषिकेष जाएंगे और गंगा नदी में स्नान करेंगे.''

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