क्या हिटलर के सताए यहूदी शरण मांगते हुए आए थे इजरायल? मुस्लिम देशों के इस दावे में कितना दम
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चारों तरफ इस्लामिक देशों से घिरे इजरायल पर यहूदियों के अलावा फिलिस्तीनी भी दावा करते रहे. फिलहाल सोशल मीडिया पर कई दावे दिखेंगे, जिनके मुताबिक ये जमीन असल में मुस्लिमों की थी. उन्होंने हिटलर के सताए यहूदियों को शरण दी और फिर यहूदियों ने उन्हें अपने ही घर से निकाल दिया. लेकिन सच क्या है? कौन यहां पहले से बसा हुआ था, जबकि कौन जबरन घर में घुसा?
करीब 13 दिनों की लड़ाई में इजरायल और फिलिस्तीन दोनों ही तरफ के 5 हजार से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकीं. वैसे तो युद्ध की शुरुआत हमास ने की, लेकिन माना जा रहा है कि इस टैरर गुट को गाजा पट्टी के लोगों का सपोर्ट रहा है. तभी ज्यूइश मिलिट्री की लगातार चेतावनी के बाद भी ज्यादातर लोगों ने इलाका नहीं छोड़ा. आसपास के अरब देश भी फिलिस्तीन के सुर में सुर मिला रहे हैं. उनका कहना है कि वे फिलिस्तीनियों को अपने यहां शरण नहीं दे रहे क्योंकि इससे उनका अपनी ही जमीन पर दावा कमजोर पड़ जाएगा.
क्या दलील है इजरायल की
लेबनान, सीरिया, जॉर्डन और मिस्र से घिरे इस देश का इतिहास काफी उठा-पटक वाला रहा. यहूदियों के धार्मिक ग्रंथ तोराह में लिखा है कि इजरायल वो अकेली जमीन है, जिसे खुद ईश्वर ने बनाया, और उसे यहूदियों के हवाले कर दिया.
यहां तक कि इजरायल के अलावा इसमें पड़ोसी देशों के सीमावर्ती हिस्सों का भी जिक्र है. ये इलाके आज के इजिप्ट, सीरिया, लेबनान और इराक में आते हैं. ज्यूइश इन हिस्सों पर हालांकि कोई दावा नहीं करते, बल्कि इजरायल तक सिमटे रहना चाहते हैं. हां, इतना है कि वे अपने देश की सुई-बराबर जमीन का भी बंटवारा नहीं करना चाहते.
ऐसे शुरू हुई थी यहूदी देश की कहानी
इसमें एक और बात जोड़ी जाती है. इतिहासकारों के मुताबिक, 1000 ईसा पूर्व यानी करीब सवा दो हजार साल पहले डेविड ने इजरायल पर राज किया. यहूदियों के इस वैभवशाली दौर का जिक्र हिब्रू बाइबिल में मिलता है. येरूशलम किंग डेविड की राजधानी थी. आगे चलकर उनके बेटे सोलोमन ने सत्ता संभाली, और पिता के नाम पर मंदिर भी बनवाया. इसके बाद के वक्त में कई बदलाव आए. सत्ता बनी-बिगड़ी.

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