
क्या तालिबान से निपटने के लिए भारत से मांगी मदद? अफगानी राष्ट्रपति ने दिया ये जवाब
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अफगान सेना और तालिबानी विद्रोहियों के बीच चले रहे संघर्ष पर पूरी दुनिया की नजर है. अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनका लक्ष्य कोई युद्ध जीतना नहीं है बल्कि देश में राजनीतिक स्थिरता लाना है.
अमेरिकी फौजों के जाने के बाद से ही अफगानिस्तान में तबाही चालू है. अफगान सैनिकों और तालिबान के विद्रोही लड़ाकों के बीच चल रहे संघर्ष पर पूरी दुनिया का ध्यान लगा हुआ है. तालिबान ने भी दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान के अधिकतर हिस्से पर यानी करीब 85 प्रतिशत हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है. (Photo- Getty images) इस बीच अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी (Afghanistan President Ashraf Ghani) ने एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में कई बड़ी बातें कही हैं जो तालिबान के साथ चल रहे उसके युद्ध और भारत-अफगान संबन्धों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. (Photo- Getty images)
गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.

दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति बनने की आशंका बढ़ रही है. अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय नीतियां विवादों में हैं, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की तुलना हिटलर की तानाशाही से की जा रही है. वेनेज़ुएला पर हमला करने और ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की धमकी के बाद अमेरिका ने यूरोप के आठ NATO देशों पर टैरिफ लगाया है.

इस चुनाव में तकाईची अपनी कैबिनेट की मजबूत लोकप्रियता के सहारे चुनाव में उतर रही हैं. उनका कहना है कि वो ‘जिम्मेदार लेकिन आक्रामक’ आर्थिक नीतियों के लिए जनता का समर्थन चाहती हैं, साथ ही नए गठबंधन को भी स्थिर जनादेश दिलाना चाहती हैं. गौरतलब है कि ये चुनाव पिछले निचले सदन चुनाव के महज 18 महीने के भीतर हो रहा है. पिछला आम चुनाव अक्टूबर 2024 में हुआ था.









