
दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे बड़ा पलायन, सुरक्षित ठिकाने के लिए कहां जा रहे यूक्रेनी नागरिक?
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फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया. इसके बाद यूक्रेन से लोगों का पलायन लगातार बढ़ता गया. हालात ऐसे हो गए कि जितने लोग यूक्रेन से बेघर हुए हैं, उनकी संख्या दूसरे विश्व युद्ध के समय पूरे यूरोप में हुए पलायन से भी ज्यादा हो चुकी. लेकिन पलायन कर रहे लोग आखिर किस देश की शरण ले रहे हैं?
लंबे समय से खिंचता चले जाने की वजह से रूस-यूक्रेन युद्ध पर बात भले कम हो चुकी, लेकिन ये त्रासदी काफी बड़ी है. लगातार जमीनी और हवाई हमलों के बीच यूक्रेन के बॉर्डर से लोग लगातार सुरक्षित देशों की तरफ जाने लगे. शुरुआत में वे पोलैंड की तरफ जा रहे थे, लेकिन भीड़ बढ़ने पर वहां भी अस्वीकार्यता दिखने लगी. इस बीच माइग्रेशन होता रहा. इस विस्थापन की तुलना दूसरे विश्व युद्ध से हो रही है.
माइग्रेशन पर डेटा क्या कहते हैं
रूस-यूक्रेन जंग ने यूक्रेन को उस डरावने दौर में धकेल दिया है, जिसे यूरोप ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद कभी नहीं देखा. फरवरी 2022 में जैसे ही रूसी हमले शुरू हुए, यूक्रेन के शहरों में सायरन गूंजने लगे, बम गिरने लगे और लोगों के पास सिर्फ एक ही रास्ता बचा- बच निकलना. जो कल तक सामान्य जिंदगी जी रहे थे, वे एक झटके में शरणार्थी बन गए. यूक्रेन की कुल आबादी करीब 4.1 से 4.2 करोड़ मानी जाती थी. इस हिसाब से देखें तो करीब 1 करोड़ लोग विस्थापित हो चुके हैं. यानी लगभग हर चार में से एक यूक्रेनी को अपना घर छोड़ना पड़ा है.
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यूरोप से करीब 3 से 4 करोड़ लोग विस्थापित हुए थे. ये पलायन कई सालों में धीरे-धीरे हुआ था, क्योंकि दूसरा विश्व युद्ध लगभग सात साल तक चला. इसके मुकाबले यूक्रेन युद्ध में बहुत कम समय में हालात इतने भयावह हो चुके कि करीब एक तिहाई आबादी घर छोड़ने को मजबूर हो गई. लाखों लोग यूक्रेन के अंदर ही भटक रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग जान बचाकर दूसरे देशों में पहुंच चुके हैं. दूसरे विश्व युद्ध में जो विस्थापन सालों में हुआ था, वही यूक्रेन में कुछ ही महीनों में हो गया.
यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजी (यूएनएचसीआर) के अनुसार, 53 लाख पूरे यूरोप में फैले हुए हैं. वहीं लाखों लोग देश के भीतर ही लगातार विस्थापित हो रहे हैं. जिन इलाकों में बमबारी और गोलीबारी तेज है, वहां लोग बेसमेंट, मेट्रो स्टेशनों और अंडरग्राउंड शेल्टर में रह रहे हैं.
देश के अंदर भी हो रहा माइग्रेशन

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