
नया जनादेश या सत्ता का अंत? पीएम सनई तकाईची ने 18 महीने के भीतर जापान को चुनाव में झोंका
AajTak
इस चुनाव में तकाईची अपनी कैबिनेट की मजबूत लोकप्रियता के सहारे चुनाव में उतर रही हैं. उनका कहना है कि वो ‘जिम्मेदार लेकिन आक्रामक’ आर्थिक नीतियों के लिए जनता का समर्थन चाहती हैं, साथ ही नए गठबंधन को भी स्थिर जनादेश दिलाना चाहती हैं. गौरतलब है कि ये चुनाव पिछले निचले सदन चुनाव के महज 18 महीने के भीतर हो रहा है. पिछला आम चुनाव अक्टूबर 2024 में हुआ था.
जापान की प्रधानमंत्री सनई तकाईची ने सोमवार को संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' को भंग करने का ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही देश में समय से पहले आम चुनाव का रास्ता साफ हो गया है. क्योदो न्यूज के मुताबिक मतदान 8 फरवरी को होने की संभावना है, जबकि आधिकारिक चुनाव प्रचार 27 जनवरी से शुरू होगा.
प्रधानमंत्री तकाईची ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वो जनता से नया जनादेश लेना चाहती हैं और चुनाव के नतीजों को अपने प्रधानमंत्री पद से जोड़ा है. निचले सदन को भंग करने का फैसला पिछले शुक्रवार को लिया गया था, जिसे संसद के मौजूदा सत्र के पहले ही दिन लागू किया गया.
ये चुनाव तकाईची के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहला आम चुनाव होगा. उन्होंने 21 अक्टूबर को जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर पद संभाला था. इसके अलावा, ये पहला चुनाव है जब उनकी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने जापान इनोवेशन पार्टी (JIP) के साथ नया गठबंधन किया है.
तकाईची अपनी कैबिनेट की मजबूत लोकप्रियता के सहारे चुनाव में उतर रही हैं. उनका कहना है कि वो ‘जिम्मेदार लेकिन आक्रामक’ आर्थिक नीतियों के लिए जनता का समर्थन चाहती हैं, साथ ही नए गठबंधन को भी स्थिर जनादेश दिलाना चाहती हैं. गौरतलब है कि ये चुनाव पिछले निचले सदन चुनाव के महज 18 महीने के भीतर हो रहा है. पिछला आम चुनाव अक्टूबर 2024 में हुआ था.
जापान में क्यों जरूरी है ये स्नैप इलेक्शन?
जापान में निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) का भंग होना हमेशा बड़े सियासी संकेत देता है. मौजूदा स्नैप इलेक्शन इसलिए अहम है क्योंकि ये प्रधानमंत्री सानाए तकाईची के नेतृत्व की पहली बड़ी लोकतांत्रिक परीक्षा मानी जा रही है. अक्टूबर 2025 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने के बाद तकाईची ने आर्थिक सुधार, सरकारी खर्च बढ़ाने और सुरक्षा नीति को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.








