
कोविड वैक्सीन की वजह से भारत में बढ़े हार्ट अटैक के मामले? ICMR तलाश रहा इन 3 सवालों के जवाब
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क्या कोरोना वायरस को रोकने के लिए बनाई गई वैक्सीन से लोगों में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा है? ऐसे कुछ सवालों की खोज में अब ICMR जुट गया है. ICMR इन दिनों एक स्टडी कर रहा है जिसकी शुरुआती रिपोर्ट जुलाई 2023 में प्रकाशित होगी. अपने इस अध्ययन में आईसीएमआर भारत में युवा आबादी में कोविड-19 टीकाकरण और बढ़ते दिल के दौरे के बीच की कड़ी को समझने की कोशिश कर रहा है.
साल 2019 में चीन में कोरोना वायरस ने दस्तक दी. इसकी शुरुआत तो चीन से हुई लेकिन धीरे-धीरे इस वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया. साल 2020 आते-आते भारत में हालात बिगड़ते देख लॉकडॉउन लगाना पड़ा. इसके बाद वैक्सीन बनाने की कवायदें शुरू हुईं और कई देशों ने इस बीमारी का टीका खोज निकाला. हालांकि 2021 आते-आते भारत में भी वैक्सीन लोगों को लगाई जाने लगी. हालांकि इसके साथ ही हार्ट अटैक के मामलों में भी अचानक बढ़ोतरी देखी गई.
अप्रैल 2021 में जब भारत में कोरोना ने खतरनाक रूप लिया तब तक आम लोगों को वैक्सीन लगाना शुरू किया जा चुका था. इसी दौर में देशभर में कई लोगों की मौतें हुईं. कुछ की जान कोरोना वायरस की वजह से गई तो कुछ लोगों की मौत हार्ट-अटैक और अन्य बीमारियों की वजह से हुई. इसके बाद सवाल उठने लगे कि कोरोना वायरस को रोकने की जो वैक्सीन बनाई गई है उसकी वजह से लोगों में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा है.
ICMR कर रहा स्टडी
इन आरोपों पर ICMR एक स्टडी कर रहा है. इस स्टडी की शुरुआती रिपोर्ट जुलाई 2023 में प्रकाशित होगी. अपने इस अध्ययन में आईसीएमआर भारत में युवा आबादी में कोविड-19 टीकाकरण और बढ़ते दिल के दौरे के बीच की कड़ी को समझने की कोशिश कर रहा है.
मजबूत नतीजे पर पहुंचने के बाद ही सार्वजनिक की जाएगी रिपोर्ट
इस स्टडी की शुरुआती रिपोर्ट पिछले कुछ समय से पेंडिंग है. इसे प्रकाशित करने से पहले आईसीएमआर अब तक सामने आए निष्कर्षों की समीक्षा कर रहा है. ICMR इस रिपोर्ट को लेकर काफी गहन अध्ययन कर रहा है. तो ऐसे में कोशिश है कि इसके आंकड़े तभी सार्वजनिक किए जाएं जब वो पूरी तरह से पुष्ट हों.

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