
कोरोना: दूसरी लहर के बीच ब्रिटेन में ट्रिपल म्यूटेंट की आशंका, नए मामलों में 10% इजाफा
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ब्रिटेन ने शनिवार को COVID-19 के 2,694 नए मामले दर्ज किए, सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 16 मई से 22 मई के बीच 17,410 नए मामले सामने आए, जो पिछले सात दिनों की तुलना में 10.5% की बढ़ोतरी है.
दुनिया भर के कई देशों में कोरोना वायरस का संकट छाया हुआ है. इसी बीच ब्रिटेन में ट्रिपल म्यूटेंट की चर्चा तेज हो गयी है. ब्रिटिश स्वास्थ्य सचिव मैट हैनकॉक ने शनिवार को कहा कि यॉर्कशायर में पहली बार पाए गए एक नए ट्रिपल म्यूटेंट कोरोनावायरस वेरिएंट की जांच की जा रही थी, लेकिन इसको लेकर ऐसी कोई जानकारी सामने आई जिसमें यह बताया जा सके कि यह अधिक खतरनाक है या अधिक संक्रामक है. एक जानकारी के मुताबिक पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने शुक्रवार को कहा कि वह स्ट्रेन - VUI-21MAY-01 की बारीकी से निगरानी कर रहा था, जिसका पहली बार अप्रैल में पता चला था. देश भर में VUI-21MAY-01 के 49 मामले सामने आये हैं. जोकि विशेष रूप से इंग्लैंड के उत्तर में यॉर्कशायर और हंबर के आसपास केंद्रित हैं.
यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.

दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति बनने की आशंका बढ़ रही है. अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय नीतियां विवादों में हैं, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की तुलना हिटलर की तानाशाही से की जा रही है. वेनेज़ुएला पर हमला करने और ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की धमकी के बाद अमेरिका ने यूरोप के आठ NATO देशों पर टैरिफ लगाया है.








