
काबुल से नहीं गए ये विदेशी सैनिक, रात के अंधेरे में चलाएंगे सीक्रेट ऑपरेशन!
AajTak
अफगानिस्तान (Afghanistan) में फंसे अपने लोगों को बचाने के लिए पूर्व विदेशी सैनिकों का एक गठबंधन गुप्त रूप से काम कर रहा है. इतना ही नहीं राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) की सैन्य वापसी (US Army Withdrawal) के बाद भी ये गठबंधन अपने मिशन को अफगानिस्तान में जारी रखने की योजना बना रहा है.
अमेरिकी सेना (US Army) अफगानिस्तान (Afghanistan) से जा चुकी है. काबुल एयरपोर्ट (Kabul Airport) से अमेरिकी सेना के अंतिम तीन विमानों ने भी (US Army Withdrawal) सोमवार की देर रात उड़ान भरी. हालांकि, नाटो (NATO) सैनिक अफगानिस्तान में एक 'सीक्रेट मिशन' की योजना बना रहे हैं. ये मिशन अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से जाने के बाद भी जारी रहेगा. आइए जानते हैं क्या है वो मिशन... (फोटो- गेटी) दरअसल, NATO के कब्जे वाले हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (Hamid Karzai International Airport) के बाहर फंसे अफगान कमांडो और अन्य को बचाने के लिए उसके रिटायर्ड और एक्टिव सैनिकों का एक गठबंधन गुप्त 'भूमिगत रेलमार्ग' में काम कर रहा है. इतना ही नहीं राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) की सैन्य वापसी के बाद भी ये गठबंधन अपने मिशन को जारी रखने की योजना बना रहा है. (फोटो- गेटी)
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.








