
काबुल पर US एयरस्ट्राइक में 5 बच्चों समेत 9 निर्दोष मारे गए, अमेरिका ने मानी गलती, कहा-दुख है
AajTak
काबुल एयरपोर्ट पर किए गए हमले के आरोपियों को निशाना बनाने के लिए की गई इस एयरस्ट्राइक में कई बच्चों समेत आम नागरिकों की मौत हुई है. अब अमेरिका के पेंटागन (Pentagon) ने इस बात को स्वीकारा है कि उनकी एयरस्ट्राइक में आम लोगों की भी जान गई है.
अफगानिस्तान (Afghanistan) छोड़ने से पहले अमेरिका (America) ने काबुल पर एयरस्ट्राइक की हैं. काबुल एयरपोर्ट पर किए गए हमले के आरोपियों को निशाना बनाने के लिए की गई इस एयरस्ट्राइक में कई बच्चों समेत आम नागरिकों की मौत हुई है. अब अमेरिका के पेंटागन (Pentagon) ने इस बात को स्वीकारा है कि उनकी एयरस्ट्राइक में आम लोगों की भी जान गई है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता द्वारा जानकारी दी गई कि हमें मालूम है कि हमारी स्ट्राइक में आम लोगों की भी जान गई है. हम अभी भी स्ट्राइक के रिजल्ट को जज कर रहे हैं, हमारा मकसद ISIS-K के आतंकियों को मारना था, जिसमें हम सफल हुए हैं. अमेरिकी सेट्रंल कमांड की ओर से कहा गया है कि अगर स्ट्राइक में किसी निर्दोष की जान गई है, तो हमें उसके लिए काफी दुख है.
मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.









