
काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान ने भारत को दिया था ये प्रस्ताव
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तालिबान के वरिष्ठ नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई ने भारतीय पक्ष से संपर्क साधा और कहा कि भारत अफगानिस्तान में अपनी राजनयिक उपस्थिति बनाए रखे. तालिबान नेता ने भारतीय पक्ष से यह अनुरोध अनौपचारिक रूप से किया था. वह कतर की राजधानी दोहा में वार्ता करने वाले तालिबान गुट का हिस्सा हैं.
तालिबान के काबिज होने के बाद भारत काबुल में अपने राजनयिक कर्मचारियों को लेकर चिंतित है और उनकी सुरक्षा के मद्देनजर तमाम कदम उठा रहा है. तालिबान से औपचारिक संबंध बनाने के बजाय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफगानिस्तान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता पर जोर दे चुके हैं. लेकिन, इस बीच हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तालिबान चाहता है कि भारत काबुल में अपनी राजनयिक मौजूदगी बनाए रखे. इस सप्ताह की शुरुआत में नई दिल्ली ने काबुल से अपने अधिकारियों को वापस लाना शुरू कर दिया. भारत ने सोमवार और मंगलवार को अपने राजदूत, राजनयिकों, सुरक्षा कर्मियों और नागरिकों सहित कुछ 200 लोगों को निकाला था. (काबुल से जामनगर पहुंचे भारतीय नागरिक, फोटो-PTI)
यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.

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