
काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान ने भारत को दिया था ये प्रस्ताव
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तालिबान के वरिष्ठ नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई ने भारतीय पक्ष से संपर्क साधा और कहा कि भारत अफगानिस्तान में अपनी राजनयिक उपस्थिति बनाए रखे. तालिबान नेता ने भारतीय पक्ष से यह अनुरोध अनौपचारिक रूप से किया था. वह कतर की राजधानी दोहा में वार्ता करने वाले तालिबान गुट का हिस्सा हैं.
तालिबान के काबिज होने के बाद भारत काबुल में अपने राजनयिक कर्मचारियों को लेकर चिंतित है और उनकी सुरक्षा के मद्देनजर तमाम कदम उठा रहा है. तालिबान से औपचारिक संबंध बनाने के बजाय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफगानिस्तान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता पर जोर दे चुके हैं. लेकिन, इस बीच हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तालिबान चाहता है कि भारत काबुल में अपनी राजनयिक मौजूदगी बनाए रखे. इस सप्ताह की शुरुआत में नई दिल्ली ने काबुल से अपने अधिकारियों को वापस लाना शुरू कर दिया. भारत ने सोमवार और मंगलवार को अपने राजदूत, राजनयिकों, सुरक्षा कर्मियों और नागरिकों सहित कुछ 200 लोगों को निकाला था. (काबुल से जामनगर पहुंचे भारतीय नागरिक, फोटो-PTI)
ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.

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