
'कांग्रेस को गांधी परिवार से बाहर देखने की जरूरत...', पूर्व राष्ट्रपति की बेटी ने पार्टी की हालत पर जताई चिंता
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शर्मिष्ठा ने कहा कि आज मेरे पिता होते तो कांग्रेस के मौजूदा हालत से काफी परेशान होते. यह सिर्फ मेरे ही नहीं, हर कांग्रेसी नेता के मन के हालात हैं. मेरे BJP में जाने की बात अफवाह है, मैं कहीं नहीं जा रही हूं. मैं हार्ड कोर कांग्रेसी हूं.
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस पार्टी को अपने नेतृत्व के लिए नेहरू-गांधी परिवार से बाहर देखना चाहिए. 17वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल से इतर पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही लोकसभा में कांग्रेस की सीटों की संख्या कम हो, लेकिन पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में अब भी बहुत मजबूत उपस्थिति है.
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, 'कांग्रेस देश में अब भी मुख्य विपक्षी दल है. इसका स्थान निर्विवाद है. लेकिन यह प्रश्न है कि इस उपस्थिति को कैसे मजबूत किया जाए? इस पर विचार करना पार्टी नेताओं का काम है'. उन्होंने कहा कि पार्टी में लोकतंत्र की बहाली, सदस्यता अभियान, पार्टी के भीतर संगठनात्मक चुनाव और नीतिगत निर्णयों की प्रक्रिया में हर स्तर पर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को शामिल करने की जरूरत है, जैसा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी अपनी डायरी में लिखा है. इसके अलावा कोई जादू की छड़ी नहीं है'.
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का एक नेता के रूप में वह कैसा आकलन करती हैं, इस सवाल के जवाब में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, 'राहुल गांधी को परिभाषित करना मेरा काम नहीं है. किसी भी व्यक्ति को परिभाषित करना संभव नहीं है. अगर कोई मुझसे मेरे पिता को परिभाषित करने के लिए कहे तो मैं अपने पिता की भी व्याख्या नहीं कर पाऊंगी'. नेतृत्व के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को ही इसका जवाब देना होगा.
'कांग्रेस समर्थक के रूप में मैं पार्टी को लेकर चिंतित हूं'
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, 'लेकिन एक कांग्रेस समर्थक और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में, मैं पार्टी को लेकर चिंतित हूं. और निश्चित रूप से नेतृत्व के लिए नेहरू-गांधी परिवार से बाहर देखने का समय आ गया है'. उन्होंने यह भी कहा कि चाहे लोग विश्वास करें या न करें, वह एक कट्टर कांग्रेसी हैं. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि क्या वह आज सचमुच अपनी विचारधारा को लेकर आगे बढ़ रही है. क्या बहुलवाद, धर्मनिरपेक्षता, सहिष्णुता, समावेशिता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जो कांग्रेस के मूल में रहे हैं, क्या उनका पार्टी के भीतर असल में पालन किया जा रहा है'.
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