
ईरान युद्ध के मौके का फ़ायदा उठाकर चीन क्या ताइवान पर हमला कर सकता है?
BBC
1958 में चीनी नेता माओत्से तुंग ने किनमेन और मात्सु द्वीपों पर गोलाबारी की थी. ये द्वीप चीन के तट के पास हैं, लेकिन आज भी ताइवान के नियंत्रण में हैं.
अमेरिका और इसराइल के ईरान के साथ युद्ध ने सोशल मीडिया और रणनीतिक विश्लेषकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है. क्या चीन इस मौके का फ़ायदा उठाकर ताइवान पर हमला कर सकता है, जबकि अमेरिकी सेना का ध्यान मध्य पूर्व पर केंद्रित है.
1950 के दशक में चीन ने ऐसा कदम उठाया था, जब अमेरिका मध्य पूर्व में सैन्य अभियान में व्यस्त था. लेकिन इस बार स्थिति अलग दिखाई दे रही है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ताइवान के आस-पास चीन की सैन्य गतिविधियां काफी कम हो गई हैं.
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम चीन की ओर से कूटनीतिक संकेत हो सकता है, क्योंकि मार्च के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा प्रस्तावित है. माना जा रहा है कि चीन ट्रंप की इस यात्रा के दौरान ताइवान समेत कई मुद्दों पर समझौते का माहौल बनाना चाहता है.
इसके अलावा, अमेरिका की वेनेज़ुएला और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों पर सैन्य कार्रवाइयों ने चीन की ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित किया है.
इससे भी ताइवान के ख़िलाफ़ संभावित सैन्य कार्रवाई कठिन हो सकती है.
इतिहास में एक उदाहरण मौजूद है. 1958 में चीनी नेता माओत्से तुंग ने किनमेन और मात्सु द्वीपों पर गोलाबारी की थी.

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