
हमलों की तस्वीरों पर पाबंदी और सेना की मंज़ूरी से रिपोर्टिंग: इसराइल, ईरान और खाड़ी देश मीडिया पर कैसे लगाम लगा रहे हैं?
BBC
स्वतंत्र पत्रकारों को हमलों वाली जगहों तक जाने की इजाज़त नहीं दी जा रही है और इंटरनेट की सुविधा आम तौर पर सिर्फ़ उन्हीं पत्रकारों तक सीमित है, जिन्हें सरकार के क़रीब माना जाता है.
ईरान के साथ चल रही जंग से सीधे प्रभावित देशों ने सैन्य कार्रवाइयों और दुश्मन के हमलों से जुड़ी रिपोर्टिंग को सीमित करने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं.
ईरान में पहले से ही मीडिया पर सख़्त नियंत्रण था.अब इंटरनेट को लगभग पूरी तरह बंद कर दिया गया है. जंग से जुड़ी खबरों पर भी रोक है और सरकार खुद ऐसा नैरेटिव (कहानी) गढ़ रही है, जिससे यह दिखाया जा सके कि उसके ऑपरेशन सफल हो रहे हैं.
इसराइल में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन जगहों की तस्वीरें या वीडियो बहुत कम देखने को मिल रहे हैं, जहां ईरान और हिज़्बुल्लाह के मिसाइल और ड्रोन गिर रहे हैं.
कई खाड़ी देशों ने भी चेतावनी दी है कि अगर 'राष्ट्रीय हितों' को नुकसान पहुंचाने वाली जानकारी प्रकाशित की गई, तो उसके कानूनी नतीजे हो सकते हैं. इस सिलसिले में गिरफ़्तारियों की ख़बरें भी सामने आई हैं.
बीबीसी हिन्दी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
जब ईरान के साथ इसराइल और अमेरिका की जंग शुरू हुई, तो हमलों की शुरुआती ख़बरें आते ही इंटरनेट तक पहुंच लगभग पूरी तरह बंद कर दी गई.

भारत में, एलपीजी गैस की कीमतों में इज़ाफ़ा होता दिख रहा है. इसकी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता का दौर जारी है. एलपीजी की कीमतों और उपलब्धता पर दबाव बढ़ता दिख रहा है और देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं. यहां लोगों को कैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है? बीबीसी के रिपोर्टर्स ने देश के अलग-अलग हिस्सों में यही जानने की कोशिश की.












