
एलपीजी संकट दूर करने के लिए केरोसीन बंटवाएगी सरकार, लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क कहां है?
BBC
पहले केरोसीन के डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े रहे डीलरों का कहना है कि पुराने नेटवर्क को खड़ा करना महंगा काम है और अल्पकालिक ज़रूरत के लिए कोई इसमें पैसा क्यों लगाएगा?
भारत में तेल और गैस सप्लाई पर ईरान और इसराइल-अमेरिका के बीच युद्ध का असर अब किसी से छुपा नहीं है. सोशल मीडिया पर गैस की किल्लत से जूझते लोगों के वीडियो छाए हुए हैं.
केंद्र सरकार भी मान रही है कि एलपीजी की कमी है लेकिन साथ ही यह भी कह रही है कि यह किल्लत पैनिक बुकिंग या घबराहट में बुकिंग की वजह से है.
इसके साथ ही केंद्र सरकार का दावा है कि एलपीजी की कमी से निपटने के लिए वैकल्पिक इंतज़ाम भी किए हैं. सरकार के अनुसार खाना बनाने और रोशनी करने के लिए 48 हज़ार लीटर से ज़्यादा केरोसीन का इंतज़ाम किया गया है.
लेकिन सवाल यह है कि ये केरोसीन या मिट्टी का तेल लोगों तक पहुंचेगा कैसे? 2020 में केरोसीन का वितरण बंद होने के बाद इसका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क ख़त्म हो चुका है.
बीबीसी हिन्दी को केरोसीन के डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े कुछ पुराने डीलर्स ने बताया कि अब उस नेटवर्क को खड़ा करना आसान नहीं है और यह सवाल भी पूछा कि इस अल्पकालिक व्यवस्था से कोई क्यों जुड़ना चाहेगा?
मध्यपूर्व के मौजूदा हालात पर शनिवार को भी विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और शिपिंग मिनिस्ट्री के अधिकारियों ने एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की.

भारत में, एलपीजी गैस की कीमतों में इज़ाफ़ा होता दिख रहा है. इसकी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता का दौर जारी है. एलपीजी की कीमतों और उपलब्धता पर दबाव बढ़ता दिख रहा है और देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं. यहां लोगों को कैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है? बीबीसी के रिपोर्टर्स ने देश के अलग-अलग हिस्सों में यही जानने की कोशिश की.












