
'कश्मीरी पंडितों' पर दिग्विजय सिंह को नहीं मिला 3 सवालों के जवाब, गृहमंत्री अमित शाह को लिखा पत्र
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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने कश्मीरी पंडितों को लेकर तीन सवाल पूछे हैं. दिग्विजय का दावा है कि उन्होंने यह तीनों सवाल राज्यसभा में भी पूछे थे, लेकिन इन प्रश्नों को गोपनीय प्रकृति का बताकर निरस्त कर दिया गया.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि गृह विभाग ने कश्मीरी पंडितों को लेकर पूछे गए उनके 3 सवालों का जवाब दिए बिना उनके प्रश्नों को निरस्त कर दिया है. उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सवाल पूछा है कि आखिर उनके सवालों के जवाब दिए बिना उन्हें निरस्त क्यों कर दिया गया?
उन्होंने गृह मंत्री को लिखे पत्र में कहा, 'राज्यसभा में गृह विभाग से संबन्धित तारांकित प्रश्न क्र. 1528 पूछा गया था, इसका 8 फरवरी 2023 को सदन में उत्तर दिया जाना नियत था. मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि ‘कश्मीरी पंडितों की समस्याओं’ को लेकर किए गए मेरे प्रश्न को गोपनीय प्रकृति का बताकर निरस्त कर दिया गया. मैं इस पत्र के माध्यम से संसद में पूछे गये मेरे प्रश्नों को फिर दोहरा रहा हूं. यह समझ से परे है कि कश्मीरी पंडितों के लिये मेरे द्वारा उठाये गये सवाल के उत्तर में ऐसा क्या गोपनीय था, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता था?.'
दिग्विजय ने इन सवालों को दोहराया
> कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की हत्याओं को रोकने के लिये सरकार ने क्या कदम उठाये हैं?> क्या सरकार ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के वेतन को इसलिये रोक दिया है, क्योंकि उन्होंने हत्या की आशंका से अपना स्थान परिवर्तन करने की मांग की थी? यदि हां तो इसके क्या कारण हैं?> क्या सरकार कश्मीर की हिन्दू आबादी को कश्मीर घाटी से बाहर पुनर्स्थापित करना चाहती है? दिग्विजय ने आगे कहा, 'ये सवाल हमारी पार्टी के राहुल गांधी जी के समक्ष भी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सामने आए. कश्मीरी हिन्दू कर्मचारी वहां भयभीत हैं और उन्हें सरकार की तरफ से समुचित और प्रभावी आश्वासन नही मिला है. मुझे इन सवालों में ऐसी कोई बात भी नहीं दिखाई देती जिनका उत्तर देने पर राष्ट्र के गोपनीय महत्व के तथ्य उजागर हो सकते हैं. आपके जवाब नहीं देने से कश्मीरी पंडितों और वहां की हिन्दू आबादी में यह संदेश जाएगा कि सरकार सिर्फ कश्मीरी पंडितों या हिन्दुओं की बात भर करती है किन्तु उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है. इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है कि आप मेरे इन सवालों का व्यक्तिगत तौर पर उत्तर देने का कष्ट करें. आशा है आप मुझे इन प्रश्नों का उत्तर अवश्य देंगे.'

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