
एकनाथ शिंदे ने बनाई शिवसेना की नई टीम, उद्धव से छीन पाएंगे पार्टी की कमान?
AajTak
शिवसेना की कमान उद्धव ठाकरे परिवार से छीनने के लिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने कदम बढ़ा दिए हैं. ऐसे में उन्होंने उद्धव ठाकरे के प्रभाव वाली शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को भंग कर नई टीम गठित कर दी है, जिसमें उन्होंने अपने करीबी नेताओं को नियुक्त किया है. हालांकि, शिंदे की नई टीम के जरिए क्या उद्धव से पार्टी छीन पाएंगे? आइये जानते हैं...
महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद अब एकनाथ शिंदे शिवसेना पर कब्जे की जंग में कूद गए हैं. उद्धव से शिवसेना की बागडोर छीनने के लिए शिंदे ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी भंग कर नई कार्यकारिणी बना दी है. सवाल है कि उनकी ये कार्यकारिणी कितनी वैध है? क्या इसके जरिए वे उद्धव ठाकरे के हाथों से पार्टी की कमान छीन लेंगे?
शिंदे ने बनाई शिवसेना की नई टीम शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में आदित्य ठाकरे, मनोहर जोशी, लीलाधर डाके, दिवाकर रावते, सुधीर जोशी संजय राव, सुभाष देसाई, रामदास कदम, गजानन कीर्तिकर, आनंद गीते, आनंदराव अडसूल, आनंद राव व एकनाथ शिंदे शामिल थे. शिंदे ने सोमवार को इस कार्यकारिणी की भंग कर अपनी ओर से नई कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया. इसमें रामदास कदम और आनंद राव अडसुल को फिर से नेता के तौर पर नियुक्त किया. उप नेता के तौर पर यशवंत जाधव, गुलाबराव पाटिल, उदय सामंत, तानाजी सावंत, शिवाजीराव पाटिल, विजय नाहटा और शरद पोंसे को नियुक्ति दी गई जबकि दीपक केसरकर को नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का प्रवक्ता बनाया गया है.
साफ है कि शिंदे ने शिवसेना की नई कार्यकारिणी से उद्धव के करीबी नेताओं की छुट्टी कर अपने करीबी नेताओं को नियुक्त किया है. पुरानी राष्ट्रीय कार्यकारणी से महज दो नेताओं को लिया गया है, जो उद्धव खेमा छोड़कर सोमवार को उनके साथ आए थे.
नई कार्यकारिणी कितनी वैध सवाल यह है कि शिंदे की बनाई कार्यकारिणी की वैधता क्या होगी. वरिष्ठ पत्रकार अरविंद सिंह कहते हैं कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का अधिकार पार्टी के अध्यक्ष के हाथ में होता है. ऐसे में शिंदे ने जिस तरह से शिवसेना की पुरानी कार्यकारणी को खत्म कर नई कार्यकारिणी बनाई है, उसकी वैधता पर सवाल उठना लाजमी है. उद्धव खेमा इसे चुनाव आयोग में चैलेंज कर सकता है. चुनाव आयोग शिवसेना के संविधान के लिहाज से भी हर पहलू को देखेगा और उसके बाद ही कोई फैसला करेगा.
क्या उद्धव से छीनी जा सकती है अध्यक्षता एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के 40 विधायकों को अपने साथ मिलाकर उद्धव का तख्तापलट तो कर दिया, लेकिन शिवसेना की कमान अब भी ठाकरे परिवार के पास ही है. इससे छीनना आसान नहीं है. शिवसेना के संविधान के मुताबिक शिवसेना के प्रमुख का चुनाव पार्टी की प्रतिनिधि सभा को करना होता है. पार्टी की प्रतिनिधि सभा गांव स्तर से लेकर तालुका स्तर और जिला स्तर के तमाम संगठनात्मक वैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर है. इसमें सांसद और विधायकों के साथ-साथ पार्टी के कई विभागों के मुखिया होते हैं.
साल 2018 में शिवसेना की प्रतिनिधि सभा में 282 लोग शामिल थे. इन सभी लोगों ने मिलकर ही उद्धव ठाकरे को शिवसेना का अध्यक्ष चुना था. उद्धव को प्रतिनिधि सभा के जरिए भी हटाया जा सकता है. इसीलिए एकनाथ शिंदे ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी भले बदल दी हो लेकिन पार्टी के प्रमुख पद को हाथ नहीं लगाया है. उद्धव ठाकरे अभी भी शिवसेना के अध्यक्ष हैं.

सूरत में शनिवार को शहर के बीचों-बीच एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने बस सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सूरत महानगर पालिका की बीआरटीएस बस में बुर्का पहने एक महिला ने बस चालक पर हमला कर दिया. यह घटना बस में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

Dense fog in Delhi NCR has significantly reduced visibility, affecting areas like Noida, Ghaziabad, and Faridabad. Similar conditions are observed in Uttar Pradesh, Haryana, and Punjab. The weather department predicts cold day conditions in Punjab, Haryana, and Chandigarh, leading to colder temperatures and the need for caution on roads.

ग्रीनलैंड पर जल्द से जल्द क्यों कब्जा करना चाहते हैं ट्रंप... अमेरिका के 250वें बर्थडे से है कनेक्शन
2026 की शुरुआत में वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन के बाद दुनिया एक नए भू-राजनीतिक दौर में पहुंच गई है. डोनाल्ड ट्रंप अब ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की खुली बात कर रहे हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या यह रणनीतिक जरूरत है या अमेरिका के विस्तारवाद की पुरानी सोच की वापसी.

उत्तराखंड की चार धाम यात्रा के मंदिर परिसरों में इस साल से मोबाइल फोन और कैमरों पर पूरी तरह से बैन रहेगा. दिल्ली में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद CAQM ने GRAP-4 लागू कर दिया है. ट्रकों की दिल्ली में एंट्री बंद कर दी गई है और स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाने का निर्देश दिया गया है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे. प्रधानमंत्री की अगुवाई में US कॉन्सुलेट तक मार्च निकाला गया.

माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या आज मनाया जा रहा है. इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज के संगम स्थल पर एकत्र हुए हैं. ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे से स्नान आरंभ हो गया है जो दिन भर चलता रहेगा. स्थानीय प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि इस वर्ष तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु मौनी अमावस्या के स्नान के लिए संगम क्षेत्र में पहुंचेगे.

जोशीमठ क्षेत्र में जंगलों में लग रही आग का सिलसिला अब भी जारी है. फूलों की घाटी, थेंग गांव, तपोवन रेंज और नीति घाटी के जंगलों में तगड़ी आग भड़क चुकी है. खासकर जोशीमठ के सामने चाई गांव के जंगलों में भीषण आग लगातार फैल रही है. कई दिन से बारिश और बर्फबारी न होने की वजह से पहाड़ सूखे हुए हैं जिसका असर जंगलों पर पड़ रहा है.







