
उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं और विनाश पर हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
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उत्तराखंड हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाओं के जरिए जोशीमठ में 600 से ज्यादा घरों में आई दरारों की भयावहता का जिक्र किया है. याचिका में कहा गया है कि कर्णप्रयाग में 50 से ज्यादा घरों में दरारे आ चुकी हैं. इन घरों में रहने वाले परिवार पीपलकोटी या अन्य जगह शिफ्ट किए गए हैं. उनके रहने का जो दर्जा और सुविधाएं हैं वो मानवीय नजरिए से समुचित नहीं है. उन विस्थापित पीड़ितों को ना ही उचित मुआवजा मिला है.
उत्तराखंड हाई कोर्ट में जोशीमठ, कर्णप्रयाग और एनटीपीसी प्रोजेक्ट्स के साथ ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन प्रोजेक्ट व चार धाम रोड परियोजना इत्यादि मामलों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य और केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर छह हफ्ते में जवाब देने को कहा है.
'विस्थापित पीड़ितों को नहीं मिला उचित मुआवजा'
याचिकाकर्ता अजय गौतम ने तीन अलग-अलग याचिकाओं के जरिए जोशीमठ में 600 से ज्यादा घरों में आई दरारों की भयावहता का जिक्र किया है. याचिका में कहा गया है कि कर्णप्रयाग में 50 से ज्यादा घरों में दरारे आ चुकी हैं. इन घरों में रहने वाले परिवार पीपलकोटी या अन्य जगह शिफ्ट किए गए हैं. उनके रहने का जो दर्जा और सुविधाएं हैं वो मानवीय नजरिए से समुचित नहीं है. उन विस्थापित पीड़ितों को ना ही उचित मुआवजा मिला है. उनके साथ रहने वाले गोवंश व अन्य पशु भी बेसहारा हो गए हैं.
उत्तराखंड और केंद्र सरकार को HC का नोटिस
जोशीमठ की आबादी तकरीबन 15 से 20000 है. चार धाम यात्रा के दिनों में ये 100000 तक और बढ़ जाती है. वहां पर कोई भी सीवर सिस्टम नहीं है जिस कारण पहाड़ों में लोग गड्ढा कर वेस्ट डाल रहे हैं. इसके अलावा याचिकाओं में अन्य व्यवहारिक, कानूनी और तकनीकी बिंदुओं पर भी कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया गया है. इस पूरे प्रकरण के अध्ययन के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाने की भी गुहार लगाई गई है. विशेषज्ञ कमेटी जोशीमठ और कर्णप्रयाग को बचाने के लिए उपाय सुझाएगी. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ में उत्तराखंड और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 6 हफ्ते का समय देते हुए जवाब मांगा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 अगस्त को होगी.
'लगातार हो रहे ब्लास्ट और रोड कटिंग बड़ा मुद्दा'

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