
इजरायल-फिलिस्तीन के टकराव के बीच लेबनान से क्यों भिड़ गए मुस्लिम देश?
AajTak
इजरायल के हवाई हमलों के खिलाफ फिलिस्तीनियों के समर्थन में खड़े कुछ मुस्लिम देशों में ही नई रार छिड़ती हुई दिख रही है. अपमानजनक टिप्पणी से नाराज सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन ने लेबनान के राजदूतों को तलब किया है.
फिलिस्तीन और इजरायल में जारी संघर्ष की वजह से मध्य-पूर्व में पहले से ही तनाव बरकरार है. अब लेबनान के विदेश मंत्री के एक बयान को लेकर एक नई कलह पैदा हो गई है. लेबनान के विदेश मंत्री की अपमानजनक टिप्पणी से नाराज सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन ने लेबनान के राजदूतों को तलब किया है. लेबनान के कार्यवाहक विदेश मंत्री चारबेल वेहबे ने सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए कहा कि इन देशों की मदद से ही सीरिया और इराक में आतंकी संगठन ISIS खड़ा हुआ. विवाद के बाद दबाव इतना बढ़ा कि लेबनान के विदेश मंत्री को इस्तीफा देना पड़ गया. सऊदी के विदेश मंत्रालय ने बताया कि चारबेल वेहबे की टिप्पणी का आधिकारिक रूप से विरोध करते हुए लेबनान के राजदूत को नोटिस भेजा गया है. जारी बयान में सऊदी अरब ने कहा कि लेबनान के विदेश मंत्री का ये बयान बुनियादी राजनयिक मानदंडों का उल्लंघन है. इससे दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों पर असर पड़ेगा. इसी तरह बहरीन और कुवैत ने भी लेबनान के राजदूतों को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया है. (फोटो-ट्विटर/@FaisalbinFarhan)
ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








