
इजरायल की कैद से रिहा होने के बाद फिलिस्तीनी नागरिकों का हुआ भव्य स्वागत, आज बंधकों के तीसरे बैच को रिलीज करेगा हमास
AajTak
कतर की मध्यस्थता से हुए इस समझौते के तहत, चार दिनों में 50 इजरायली बंधकों और 150 फ़लस्तीनी क़ैदियों की अदला-बदली की जानी है. इजरायल की कैद से छोड़े गए फिलिस्तीनी नागरिकों का वहां नायकों की तरह स्वागत किया गया.
इजरायल को रविवार को हमास द्वारा रिहा किए जाने वाले बंधकों के तीसरे बैच की एक लिस्ट मिल गई है. इसके बाद उनसे बंदियों के परिवारों को उनके प्रियजनों के आगमन के बारे में सूचित करना शुरू कर दिया है. द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल को रविवार को हमास द्वारा रिहा किए जाने वाले बंधकों के तीसरे बैच की सूची मिल गई है.इजरायल और हमास के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर ने यह सूची इजरायल को दी है.
हमास ने रिहा किए 17 बंधक
यह चार दिवसीय संघर्ष विराम का तीसरा दिन होगा, कतर ने कहा कि उसे उम्मीद है कि इसके बाद और भी बंधकों की रिहाई की जाएगी. शनिवार रात बंधकों के दूसरे जत्थे में 17 बंधकों को हमास ने रिहा कर दिया. इनमें 13 इजरायली और चार थाई नागरिक शामिल थे. यह रिहाई गाजा को मानवीय सहायता (युद्धविराम का हिस्सा भी) देने पर हमास द्वारा किए गए अस्थायी संघर्ष विराम में थोड़ी देरी के बाद हुई, जिसे कतर और मिस्र के हस्तक्षेप से दूर किया गया था.
इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय का बयान
चार दिनों के दौरान 150 फ़िलिस्तीनी कैदियों के बदले कुल 50 बंधकों की अदला-बदली की जानी है. इस बीच,इजरायल ने बंधकों के बदले में 39 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा कर दिया है. इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, 'आज रिहा होने वाले बंधकों की एक सूची प्राप्त हो गई है. सुरक्षा अधिकारी सूची की जांच कर रहे हैं. बंधकों और लापता ब्रिगेडियर-जनरल (सेवानिवृत्त) गैल हिर्श, बंधकों के परिवारों को जानकारी दे दी गई है. हमारा अनुरोध है कि मीडिया उचित सावधानी बरतें.आवश्यकतानुसार अतिरिक्त विश्वसनीय जानकारी प्रदान की जाएगी और हमारा अनुरोध है कि आप अफवाहें और अनौपचारिक जानकारी फैलाने से बचें.
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय के अनुसार, रविवार को हमास द्वारा रिहा किए गए 13 इजरायलियों में छह महिलाएं और सात बच्चे और किशोर थे. टेलीवीजन फुटेज में दिखाया गया कि रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति (आईसीआरसी) के वाहन शनिवार देर रात रफ़ा सीमा पर पहुंचे जब बंधक गाजा छोड़ने की तैयारी कर रहे थे. फिर उन्हें हमास द्वारा रेड क्रॉस टीमों को सौंप दिया गया. प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय ने बाद में 13 बंधकों के इजरायल में हत्ज़ेरिम वायु सेना अड्डे पर पहुंचने पर पहला आधिकारिक वीडियो जारी किया.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.






