
अरविंद केजरीवाल के क्या पुराने तेवर लौट आए हैं, राष्ट्रीय राजनीति पर इसका कोई असर होगा?
BBC
राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि यह इस पर निर्भर करता है कि अरविंद केजरीवाल ने अपने हालिया अनुभव से क्या सीखा है
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल बहुत समय बाद अपने पुराने रंग में नज़र आए.
बहुत लंबे अरसे बाद उन्होंने अपना चिर-परिचित दावा दोहराया, ''केजरीवाल कट्टर ईमानदार है''. और इसके साथ ही कहा, 'मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, दुर्गेश पाठक और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार हैं.''
अरविंद केजरीवाल ने यह दावा शुक्रवार को राउज़ एवेन्यू कोर्ट के शराब नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में फ़ैसले के बाद किया.
कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत 23 अभियुक्तों को आरोपों से मुक्त किया है.
अदालत ने फ़ैसला सुनाते हुए जांच में हुई खामियों के लिए सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि चार्जशीट में कई खामियां हैं जिनका समर्थन किसी गवाह या बयान से नहीं होता. स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने ये भी कहा कि चार्जशीट में 'भ्रामक दावे' किए गए हैं.
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लेकिन सवाल यह है कि इससे अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की राजनीति के फलक पर वापसी हो पाएगी?













