
अमेरिका में एग्जिट पोल्स के प्रसारण को खुली छूट, किन देशों में पोल पर कैसे नियम, जानें- भारत में कितनी है सख्ती
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दिल्ली लोकसभा चुनाव 2024 की मतगणना कल होने वाली है. इससे पहले आए एग्जिट पोल के नतीजे भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए को बहुमत में दिखा रहे हैं. वैसे पोल्स को लेकर इलेक्शन कमीशन काफी सख्त रहा. इसकी गाइडलाइन के मुताबिक, ये तभी टेलीकास्ट हो सकते हैं, जब अंतिम चरण की वोटिंग भी खत्म हो जाए. लगभग सारे देशों में इसे लेकर कम-ज्यादा नियम हैं.
कुछ सालों पहले चुनावों के दौरान ही एग्जिट पोल का प्रसारण होने लगा था. इसे लेकर शिकायतें हुईं कि इसकी वजह से वोटरों का मन बदल सकता है. इसके बाद चुनाव आयोग काफी सख्त हुआ. उसने कई नियम बना दिए, ताकि किसी भी की ओपिनियन या एग्जिट पोल चुनाव खत्म होने से पहले न आएं. ये तो हुई हमारी बात, लेकिन कई देशों में एग्जिट पोल पर पाबंदी रहती है. वहीं कुछ देश इसे लेकर काफी उदार हैं.
एग्जिट पोल, वोटिंग संपन्न होने के बाद एक तरह का सर्वे है जो संभावित विजताओं, पार्टियों और वे कितने अंतर से जीतेंगी, इसका अनुमान लगाता है. ये अंदाजा खालिस अनुमान नहीं होता, बल्कि वोटरों से बातचीत पर आधारित होता है. इस काम में कई एजेंसियां लगी होती हैं जो चुनाव के हर चरण के बाद वोटरों से पोलिंग स्टेशन पर ही बात करतीं और पता लगाती हैं कि हवा का रुख क्या है. हालांकि ये बात भी है कि इसे पक्का नहीं माना जा सकता.
क्या है ओपिनियन पोल ओपिनियन पोल में वोटरों की प्राथमिकता जानी जाती है. इसमें मुद्दों पर बात करते हुए ही उनकी नाराजगी या किसी पार्टी के लिए उदारता दिख जाती है. ये सर्वे पब्लिक मूड को भांपते और चुनावी चरण शुरू होने के पहले उसके संभावित नतीजों की बात करते हैं.
देश में एग्जिट पोल का इतिहास काफी पुराना है. साठ के दशक में दिल्ली की सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज ने इसकी शुरुआत की, जो कि सरकारी है. इसके काफी बाद में मीडिया संस्थान भी पोल्स टेलीकास्ट करने लगे. नब्बे के बाद इसमें तेजी आई.
हमारे यहां क्या हैं नियम

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