
अमेरिका-ईरान वार्ता: टकराव के ख़तरे के बीच बड़ी बैठक, ट्रंप के पास क्या विकल्प?
BBC
ये बातचीत बेहद नाज़ुक दौर में हो रही है. इस वक़्त मध्य-पूर्व में अमेरिकी सेना की एक बड़ी तैनाती है. ईरान भी कह चुका है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वो भी बलपूर्वक जवाब देगा.
अमेरिका और ईरान के अधिकारी जिनेवा में सीधी बातचीत के तीसरे दौर के लिए मिल रहे हैं. इन वार्ताओं को टकराव टालने के लिए अहम माना जा रहा है.
उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि परमाणु समझौता नहीं हुआ तो वह ईरान पर हमला कर सकते हैं.
ये बातचीत ऐसे समय हो रही है जब साल 2003 में अमेरिकी अगुवाई में हुए इराक़ युद्ध के बाद पश्चिमी एशिया में अमेरिकी ने पहली बार बड़ी सैन्य तैनाती की है. वहीं, ईरान ने भी कहा है कि वह किसी भी हमले का बलपूर्वक जवाब देगा.
एक बार फिर से इन वार्ताओं की मध्यस्थता ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बुसैदी कर रहे हैं. अल्बुसैदी ने कहा कि वार्ताकारों ने 'नए और रचनात्मक विचारों और समाधानों के लिए अभूतपूर्व तरीके से खुलापन' दिखाया है.
हालांकि, किसी भी समझौते तक पहुंचने की संभावना पर अभी तक स्पष्ट स्थिति नहीं है.
ट्रंप ने कहा है कि वह कूटनीति के ज़रिए संकट सुलझाना पसंद करते हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि वह ईरान पर सीमित हमला करने पर विचार कर रहे हैं ताकि उसके नेताओं पर समझौता स्वीकार करने का दबाव बनाया जा सके.













