
अब सपने भी हमें अपने-आप नहीं, कंपनियों की मर्जी से आएंगे... क्या है ड्रीम इनक्यूबेशन, जिसे माना जा रहा बड़ा खतरा?
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सपने हम सबको आते हैं. कभी मजेदार, कभी बेसिर-पैर. कई ड्रीम साइंटिस्ट भी होते हैं, जो सपनों का मतलब बताते हैं. लेकिन क्या हो अगर सपने भी किसी प्रोडक्ट की तरह डिजाइन होने लगें. इसे ड्रीम मैनिपुलेशन कहते हैं, यानी सपनों को अपने मुताबिक तोड़-मरोड़ देना. एक अमेरिकी बियर कंपनी ने शराब बेचने के लिए सपनों तक में घुसपैठ कर डाली.
अमेरिकी बियर कंपनी कूर्स ने साल 2021 में एक नया विज्ञापन बनाया, जो सपनों में आकर लोगों को उनके ब्रांड की शराब खरीदने के लिए उकसाता. कंपनी ने दावा किया कि सोने से ठीक पहले लोग अगर उसका एड देखकर सोएं और उसके बाद पूरी रात एक खास म्यूजिक बजता रहे तो सपनों में उसी कंपनी की शराब दिखेगी. एड और फिर शराब से जुड़ा खास साउंड एक तरह के ट्रिगर का काम करेगा, जिससे वैसे ही सपने आएंगे.
एक्सपर्ट्स ने बताया खतरा
ये तो पता नहीं लगा कि कितने लोगों ने कूर्स ने इस ड्रीम मेनिपुलेशन प्रोजेक्ट में हिस्सा लिया. हालांकि इसके बाद वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक अलर्ट हो गए. सपने फिलहाल ऐसी चीज हैं, जिसपर किसी का कंट्रोल नहीं. अगर कंपनियां ही उसपर भी काबू पाने लगें तो इंसान का दिमाग पूरी तरह तहस-नहस हो जाएगा. नींद भी नेचुरल नहीं रह जाएगी, जिसका खतरनाक असर हर जगह दिखेगा.
हार्वर्ड समेत कई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज के स्लीप एंड ड्रीम रिसर्चरों ने एक ओपन लेटर लिखकर सपनों में जबरन घुसकर उसे डिजाइन करने के खतरे गिनाए. इसके बाद कंपनियों की ऐसे प्रयोग की रफ्तार पर ब्रेक लगा.
क्या है सपनों को अपने अनुसार तय करना?
सपनों को तोड़ने-मरोड़ने को ड्रीम इनक्यूबेशन कहते हैं. ये किसी खास ड्रीम को ट्रिगर करता है. तीन साल पहले मेसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने ये टर्म देते हुए कहा कि सपनों में क्या आ रहा है, इसे डिजाइन की किया जा सकता है. इसके लिए उन्होंने एक एप बनाया, जिसे सोकर पहनने पर सपनों को ट्रैक किया जा सके.

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