
UK में चुनाव से पहले जारी हुआ 'हिंदू घोषणापत्र', हिंदुओं के खिलाफ घृणा को लेकर किया ये वादा
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'हिंदू फॉर डेमोक्रेसी' ने UK में एक मजबूत एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय हिंदू समुदाय बनाने में लोगों से साथ देने की अपील की है. संस्था कहता है, 'हम सब मिलकर अपने लिए, अपने बच्चों के लिए, आने वाली पीढ़ियों के लिए और व्यापक समाज के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं.'
ब्रिटेन में 4 जुलाई को आम चुनाव होना है. प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बीते महीने ही देश में राष्ट्रीय चुनाव की तारीख का ऐलान किया था. चुनाव से पहले ब्रिटेन में राजनीतिक गतिविधियों में तेजी देखी जाने लगी है. इस बीच वहां 'हिंदू फॉर डेमोक्रेसी' नाम की संस्था ने चुनाव से पहले 'हिंदू घोषणापत्र' जारी किया है. 'हिंदू फॉर डेमोक्रेसी' अपने धोषणापत्र में कहता है, '4 जुलाई को होने वाला चुनाव एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है. आइए अपनी आवाज बुलंद उठाएं. उम्मीदवारों को जवाबदेह ठहराएं. और, अपने देश को एक बेहतर कल देने में सक्रिय रूप से हिस्सा लें. यह सिर्फ हमारा अधिकार ही नहीं, कर्तव्य है.'
साथ ही 'हिंदू फॉर डेमोक्रेसी' ने UK में एक मजबूत एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय हिंदू समुदाय बनाने में लोगों से साथ देने की अपील की है. संस्था कहता है, 'हम सब मिलकर अपने लिए, अपने बच्चों के लिए, आने वाली पीढ़ियों के लिए और व्यापक समाज के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं.' इसके अलावा संस्था द्वारा जारी 'हिंदू घोषणापत्र' में देश में हिंदुओं के खिलाफ घृणा फैलाने की घटना को अपराध की श्रेणी में रखने के अलावा और भी कई बातों के शामिल किया गया है.
'हिंदू फॉर डेमोक्रेसी' के अनुसार ब्रिटेन में समुदाय से जुड़े 1 मिलियन से अधिक लोग रहते हैं जो टैक्स, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और व्यवसाय के माध्यम से यूके की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं. संस्था का मानना है कि देश में हिंदुओं की तमाम उपलब्धियों के बावजूद, नीतियों और कानून को आकार देने में इनकी कोई एकजुट आवाज नहीं है. मीडिया, शिक्षा और राजनीति में हिंदुओं का प्रतिनिधित्व कम है. संस्था के अनुसार हिंदुओं को अपने राजनीति महत्व को पहचानने के साथ-साथ अब बदलाव का भी समय आ गया है.
इससे पहले बीते महीने ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक देश में आम चुनाव का ऐलान करते हुए वोटिंग के लिए 4 जुलाई की तारीख तय की थी. माना जा रहा है कि उन्हें इस चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है और 14 साल से सत्ता पर काबिज उनकी अगुवाई वाली कंजर्वेटिव पार्टी को सत्ता गंवानी पड़ सकती है.
चुनाव का सामना करने जा रहे सुनक न सिर्फ लेबर पार्टी से पीछे हैं, बल्कि राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वह अपनी कंजर्वेटिव पार्टी पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. सुनक ने आठ साल में पांचवें प्रधानमंत्री के रूप में लिज ट्रस के इस्तीफे के बाद अक्टूबर 2022 में शपथ ली थी, जो सिर्फ 44 दिनों तक ही सत्ता में रही थीं.

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