
क्या खत्म होगी डॉलर की बादशाहत? जानें- सोने-चांदी की कीमतें कैसे घटा देंगी US की अहमियत
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लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.
सोने-चांदी की कीमतों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. पहली बार ऐसा हो रहा है, जब हर दिन सोने-चांदी की कीमतों में 5 फीसदी या उससे ज्यादा की वृद्धि हो रही है. लेकिन ये सबकुछ बिना किसी वजह के नहीं हो रहा है बल्कि इसके पीछे ऐसे कारण छिपे हैं, जो दुनिया को एक नए टर्निंग प्वॉइंट की तरफ ले जा सकते हैं. हो सकता है कि अब सोना यानी गोल्ड डॉलर की बादशाहत को हमेशा के लिए खत्म कर दे.
दुनिया इसे De-Dollarization कह रही है, जिसका आसान भाषा में मतलब होता है, डॉलर पर अपनी निर्भरता को खत्म कर देना या कम से कम कर लेना. अगर ऐसा होता है तो इससे दो चीजें होंगी. पहला- इससे दुनिया में अमेरिका का आर्थिक प्रभुत्व खत्म हो जाएगा. अब तक अमेरिका को इसी बात का घमंड था कि दुनिया में होने वाला अधिकतम व्यापार और यहां तक कि कच्चे तेल की खरीद के लिए सारा भुगतान डॉलर में किया जाता था और क्योंकि पूरी दुनिया में डॉलर का ही बोलबाला था इसलिए अमेरिका एक सुपरपावर बना हुआ था.
लेकिन अब जिस तरह से राष्ट्रपति ट्रंप दुनिया के अलग-अलग देशों पर अपनी धौंस जमा रहे हैं, उसके बाद अधिकतर देशों ने ये तय कर लिया है कि वो डॉलर पर अपनी निर्भरता को खत्म कर देंगे या कम से कम कर लेंगे. दूसरा- अगर वाकई में डॉलर की बादशाहत को कोई खतरा पहुंचता है तो अमेरिका इसे बचाने के लिए वो सबकुछ करेगा, जिसकी अभी कल्पना भी नहीं की जा सकती.
राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि वो किसी भी सूरत में इस De-Dollarisation को बर्दाश्त नहीं करेंगे. उनका एकमात्र लक्ष्य यही है कि दुनिया डॉलर में ही व्यापार करती रहे लेकिन मौजूद हालात में ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा और इसके लिए मैं आपको कुछ जरूरी आंकड़े दिखाना चाहती हूं, जिससे आपको ना सिर्फ De-Dollarisation की ये पूरी कहानी समझ आएगी बल्कि ये भी समझ आ जाएगा कि आखिर सोना और चांदी इतने महंगा क्यों हो रहे हैं.
तो ये पूरा खेल शुरू होता है, US BONDS से जिन्हें US Treasuries भी कहा जाता है. अमेरिका कोे जब उधार की जरूरत होती है तो वो इसके लिए US BONDS की नीलामी करता है और ये कहता है कि इन BONDS को खरीदने वाले देशों को वो हर साल ब्याज भी देगा और कुछ सालों के बाद उन देशों से लिया गया पूरा पैसा वापस भी कर देगा. अब ये देश अमेरिका को उधार देने के लिए उसके US BONDS इसलिए खरीद लेते हैं क्योंकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था के सामने डूबने का खतरा नहीं है. बुरी से बुरी स्थिति में भी हर देश को ये पता होता है कि उन्होंने अमेरिका को US BONDS के रूप में जो उधार दिया है, वो उधार ना सिर्फ सुरक्षित रहेगा बल्कि इससे उन्हें हर साल ब्याज भी मिलता रहेगा.
लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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