
Tech Explained: हर कंपनी वीयरेबल गैजेट के पीछे क्यों भाग रही और एआई का इसमें क्या रोल? जानें सारे सवालों के जवाब
ABP News
पिछले कुछ समय से टेक कंपनियां वीयरेबल गैजेट पर जोर देने लगी हैं. मेटा और गूगल ने कुछ साल पहले बंद किए अपने वीयरेबल गैजेट के प्रोजेक्ट पर फिर से काम शुरू कर दिया है. जानते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है.
फेसबुक और इंस्टाग्राम के मालिकाना हक वाली कंपनी मेटा स्मार्ट ग्लासेस भी बनाती है. इस साल मेटा अपनी पहली स्मार्टवॉच भी लॉन्च करेगी. आईफोन बनाने वाली कंपनी वॉच मार्केट का बड़ा नाम है और अब स्मार्ट ग्लासेस भी बना रही है. इसी तरह गूगल भी इस साल अपने स्मार्ट ग्लासेस लॉन्च कर देगी. दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने कुछ समय पहले ही ऐप्पल के विजन प्रो की तरह गैलेक्सी XR हेडसेट लॉन्च किया था. गौर करने वाली बात यह भी है कि ये कंपनियां अब जिन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं, उन्हें कुछ साल पहले बीच में ही बंद कर दिया था. अब उन्हें फिर से रिवाइव किया जा रहा है. इनकी तरह ही छोटी टेक कंपनियां तेजी से भी स्मार्ट रिंग, स्मार्टवॉच, फिटनेस ट्रैकर और दूसरे वीयरेबल गैजेट लॉन्च कर रही हैं. ऐसे में आज के एक्सप्लेनर में हम जानेंगे कि अचानक से सभी कंपनियां वीयरेबल टेक के पीछे क्यों भागने लगी हैं. कैसे धीरे-धीरे वीयरेबल गैजेट हमारे जीवन का हिस्सा बनने लगे हैं और इसमें एआई और बिग डेटा का कितना बड़ा हाथ है.
अचानक से क्यों बढ़ गई वीयरेबल गैजेट की मांग?
पिछले कुछ सालों में वीयरेबल टेक्नोलॉजी फिटनेस के शौकीनों के दायरे से बाहर निकलकर आम आदमी तक पहुंच गई है. अब शॉपिंग करने से लेकर सराउंडिग से इंटरेक्शन करने तक में यह टेक्नोलॉजी अपना असर दिखा रहा है. आज जिस स्तर पर स्मार्टवॉचेज, फिटनेस ट्रैकर और दूसरे वीयरेबल गैजेट की खरीद हो रही है, यह किसी ने सोचा भी नहीं था और यह ट्रेंड लगातार बढ़ता ही जा रहा है. अब वीयरेबल गैजेट का मतलब सिर्फ स्टेप काउंटिंग और हार्ट रेट मॉनिटरिंग तक नहीं रहा गया है. लोग अब इन्हें पर्सनल सेफ्टी, प्रोडक्टिविटी और सोशल स्टेटस आदि के लिए खरीद रहे हैं.
हमारे जीवन में कैसे जगह बनाते जा रहे हैं वीयरेबल गैजेट?













