
Shreyas Iyer suffers Injury: श्रेयस की 'तिल्ली' में लगी चोट कितनी खतरनाक? फैन्स का एक ही सवाल.. मैदान पर वापसी कब
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सिडनी वनडे मैच के दौरान श्रेयस अय्यर को लगी तिल्ली (spleen) की चोट ने प्रशंसकों के बीच चिंता बढ़ा दी है. लोगों के मन में सवाल है कि क्या श्रेयस इस चोट से उबरने के बाद वापिस क्रिकेट खेल पाएंगे या नहीं. ऐसे में यहां हम आपको बता रहे हैं कि स्प्लीन यानी तिल्ली में चोट का क्या मतलब है, ये कितनी खतरनाक है और इसका इलाज कैसे किया जाता है.
जब भारतीय क्रिकेटर श्रेयस अय्यर सिडनी में एक शानदार कैच लेते हुए अजीब तरह से जमीन पर गिरे और दर्द से कराहने लगे तो क्रिकेट फैन्स ने सोचा कि शायद उनकी पसलियों में चोट लग गई है. लेकिन कुछ ही देर में पता चला कि यह कहीं ज्यादा गंभीर चोट थी. उन्हें पसलियों के पास स्प्लीन यानी तिल्ली में चोट लगी थी. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने बाद में कंफर्म किया कि उन्हें तिल्ली में चोट लगी है. उनकी हालत पर कड़ी निगरानी की जा रही है.
तिल्ली क्या है और यह क्या करती है? स्प्लीन को हिंदी में तिल्ली और प्लीहा भी कहते हैं. यह एक मुलायम, मुट्ठी के आकार का अंग है जो पसलियों के बाईं ओर ठीक नीचे स्थित होता है. इसके दो बड़े काम हैं. पहला संक्रमण से लड़ने में मदद करना और दूसरा पुरानी या डैमेज लाल रक्त कोशिकाओं (red blood cells) को हटाकर खून को साफ करना. ब्लड वेसल्स से घिरे होने के कारण यह शरीर के सबसे नाजुक अंगों में से एक है.
तिल्ली खून के लिए एक फिल्टर का काम करती है जो खून से बैक्टीरिया, वायरस और अन्य चीजों को हटाती हैं. जब खून तिल्ली से होकर बहता है तो श्वेत रक्त कोशिकाएं (white blood cells) किसी भी बाहरी आक्रमणकारी पर हमला करके उसे हटा देती हैं. लाल रक्त कोशिकाओं का जीवनकाल लगभग 120 दिनों का होता है जिसके बाद तिल्ली उन्हें तोड़ देती है.
किसी जोरदार चोट जैसे कि बाईं ओर जोर से गिरना या पसलियों में चोट लगने जैसी कंडीशन में तिल्ली फट सकती है और शरीर के अंदर खून बह सकता है. डॉक्टर इसे splenic laceration कहते हैं.
इस तरह की चोट कितनी गंभीर होती है? मेडिकल प्रोफेशन्स से जुड़ी एक वेबसाइट 'UpToDate' में छपे मेडिकल पेपर में बताया गया है कि प्लीहा की चोट बहुत हल्की से लेकर जानलेवा तक हो सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि स्प्लीन अगर फटी है तो घाव कितना गहरा है और इससे कितना खून बह रहा है. डॉक्टर यही पता लगाने के लिए कि नुकसान कितना गंभीर है, सीटी स्कैन जैसी जांच का इस्तेमाल करते हैं
मामूली चोट में एक छोटा सा घाव या खरोंच हो तो वो अपने आप ठीक हो जाता है. लेकिन गंभीर चोट लगने या अंदर ब्लीडिंग होने से तुरंत सर्जरी करानी पड़ती है.

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