
Shraddha Walker Murder Case: हड्डियां, सबूत और पॉलीग्राफ टेस्ट... जानें कहां तक पहुंची श्रद्धा मर्डर केस की जांच
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इस केस में पुलिस ने आला-ए-कत्ल यानी कत्ल में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद कर लिया है. अब श्रद्धा की हत्या का मामला उन हड्डियों की जांच पर आकर ठहर गया है, जो आफताब की निशानदेही पर पुलिस ने महरौली-छतरपुर के जंगलों से बरामद की हैं.
Shraddha Walker Murder Case: श्रद्धा वॉल्कर के मर्डर का आरोपी आफताब अमीन पूनावाला अब जेल की सलाखों के पीछे जा चुका है. जहां उसे एक अलग सेल में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है. इससे पहले उसका पॉलीग्राफ टेस्ट किया गया था. जिसमें उसने सवालों के चौंकाने वाले जवाब दिए. यहां तक कि आफताब की बॉडी लैंग्वेज देख कर फोरेंसिक एक्सपर्ट भी हैरान थे. अब मामला उन हड्डियों की जांच पर आकर ठहर गया है, जो आफताब की निशानदेही पर पुलिस ने महरौली-छतरपुर के जंगलों से बरामद की हैं.
कब सामने आएगा हड्डियों का सच? आफताब के पुलिस रिमांड की मियाद शनिवार को पूरी हो गई थी. इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया. इससे पहले तीन किश्तों में दिल्ली पुलिस उसे 14 दिनों के रिमांड पर ले चुकी थी. दिल्ली पुलिस आफताब से श्रद्धा मर्डर केस से जुड़ा एक-एक सच जान लेना चाहती है और इन सच्चाइयों में उन हड्डियों की सच्चाई भी शामिल है, जो आफताब की निशानदेही के बाद पुलिस ने महरौली के जंगलों समेत दूसरी जगहों से बरामद की हैं.
आला-ए-कत्ल बरामद श्रद्धा की हत्या करने के बाद आफताब की एक दूसरी गर्लफ्रेंड भी थी. वो गर्लफ्रेंड उसके उस वाले फ्लैट में भी आई थी, जहां श्रद्धा की लाश को फ्रिज में रखा गया था. पुलिस के मुताबिक आफताब ने श्रद्धा को दी अंगूठी अपनी उस गर्लफ्रेंड को भी गिफ्ट कर दी थी. पुलिस ने वो अंगूठी बरामद कर ली है. इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने श्रद्धा के मर्डर में इस्तेमाल किया हथियार यानी आरी भी बरामद कर ली है, जिससे आरोपी आफताब ने श्रद्धा की लाश को टुकड़े टुकड़े करने का काम किया था.
हड्डियों की जांच पर एक्सपर्ट की राय अब चलिए एक बार के लिए मान लेते हैं कि आफताब ने श्रद्धा का कत्ल वाकई 18 मई 2022 को ही किया था. फिर किश्तों में उसकी लाश के टुकड़े वो महरौली के जंगलों समेत दूसरी जगहों पर फेंकता रहा. ऐसे में अब इतने महीनों के बाद मिली हड्डियों से क्या श्रद्धा की मौत तारीख या उसके वक्त का पता लगाया जा सकता है? क्या इन हड्डियों का पोस्टमॉर्टम वाकई मुमकिन है? और क्या हड्डियों के पोस्टमॉर्टम से कत्ल से जुड़ी सच्चाई सामने आ सकती है? तो इन सवालों के जवाब को फोरेंसिक एक्सपर्ट्स के नज़रिए से समझना जरूरी है.
मुमकिन है हड्डियों की ऑटोप्सी जानकारों की मानें तो पुरानी से पुरानी हड्डियों की ऑटोप्सी यानी पोस्टमॉर्टम भी मुमकिन है. बस हर गुजरते वक्त और तारीख के साथ पोस्टमॉर्टम के नतीजों का दायरा सीमित होता जाता है. खास कर वैसी हड्डियां या शव के हिस्से जिनके सॉफ्ट टिश्यू खत्म हो चुके हों, उनके बारे में सटीक नतीजे पता करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है. लेकिन पोस्टमॉर्टम फिर भी मुमकिन है. मौत के 15 से 20 दिनों के दरम्यान बरामद किसी लाश को देख कर उसकी मौत की तारीख के बारे में पता करना तो मुमकिन होता है, लेकिन इसके कुछ पता करने के लिए केस हिस्ट्री की भी दरकार होती है, जो आम तौर पर पुलिस ही फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को मुहैया कराती है.
श्रद्धा की लाश के टुकड़ों की जांच क्योंकि 15-20 दिनों में खुली जगह पर लाश पड़ी होने से कुछ फौना वैगरह उस पर पनपने लगते हैं. ममीफिकेशन या एडिफोसी की शुरुआत हो जाती है. ये किसी भी लाश में होनेवाली वो तब्दीलियां हैं जो मौसम और वातावरण पर निर्भर करते हैं. ऐसे में अगर लाश पुरानी हो तो उसकी हिस्ट्री का पता लगाना बेहद जरूरी हो जाता है. अब बात श्रद्धा के लाश के टुकडों की. पुलिस ने इन लाश के टुकडों को फोरेंसिक एक्सपर्ट्स के हवाले किया है, जहां डीएनए जांच के साथ-साथ इन टुकडों का पोस्टमॉर्टम भी होना है.

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