
MRF के शेयर का बुरा हाल, एक साल में 40000 रुपये हुआ सस्ता, अब ये ताजा भाव
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MRF Stock Price: इस गिरावट की वजह से MRF का मार्केट कैप घटकर 48 हजार करोड़ रह गया है. हालांकि कंपनी ने पिछले 5 साल में करीब 60 फीसदी का रिटर्न दिया है. शेयर मंगलवार को लुढ़ककर 1,12,400 रुपये तक पहुंच गया, जो कि इसका एक साल का न्यूनतम स्तर है.
रिटेल निवेशक चाहता है कि उसके पोर्टफोलियो में भी एक MRF का शेयर हो, पिछले दो दशक में MRF के शेयर ने निवेशकों को मोटा पैसा बनाकर दिया है. लेकिन पिछले एक साल से MRF का स्टॉक ठंडा पड़ा है.
दरअसल, मंगलवार को MRF के शेयर ने नया 52 वीक लो बना दिया, ये शेयर लगातार गिर रहा है. शेयर मंगलवार को लुढ़ककर 1,12,400 रुपये तक पहुंच गया, जो कि इसका एक साल का न्यूनतम स्तर है. जबकि शेयर का 52 वीक हाई 1,51,445 रुपये है. पिछले एक साल में शेयर की चाल को देखें तो शेयर ने करीब 20 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है. महज एक महीने में शेयर करीब 14 फीसदी तक टूट चुका है. शेयर अपने हाई के करीब 40000 रुपये नीचे लुढ़क चुका है.
इस गिरावट का अहम कारण से ऑटोमोबाइल्स सेक्टर दबाव में है और साथ ही भारतीय शेयर बाजार में पिछले करीब 4 महीने से गिरावट का दौर चल रहा है, जिससे लगातार टूट रहा है. इस गिरावट की वजह से MRF का मार्केट कैप घटकर 48 हजार करोड़ रह गया है. हालांकि कंपनी ने पिछले 5 साल में करीब 60 फीसदी का रिटर्न दिया है.
MRF कंपनी की कहानी बेहद ही दिलचस्प है, आइए जानते हैं कैसे गुब्बारे बनाते-बनाते ये टायर मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस में आई और कैसे इसके शेयर ने देश के सबसे हैवीवेट शेयर का तमगा हासिल किया. MRF Ltd Share के शेयर जनवरी 2024 में पहली बार 1.50 लाख रुपये के पार निकल गया था, जो कि शेयर का ऑलटाइम हाई भी है. ़
देश का सबसे महंगा शेयर कौन?
एक समय MRF का शेयर देश का सबसे महंगा शेयर हुआ करता था. लेकिन फिलहाल शेयर के भाव में भारी गिरावट की वजह से शेयर दूसरे पायदान पर पहुंच गया है, शेयर भाव गिरकर 112400 रुपये तक पहुंच गया है. जबकि फिलहाल Elcid Investment का शेयर पहले पायदान पर है. जो कि देश का सबसे महंगा शेयर है. फिलहाल elcid investment का शेयर 1,37,010 रुपये का है.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












