
Vastu Tips: घर की इस दिशा में शीशा लगाना होता है बहुत शुभ, खिंची चली आती है धन-दौलत
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Vastu Tips: वास्तु में शीशा घर की ऊर्जा पर गहरा असर डालता है, जिसको लेकर लोगों के मन में कई भ्रम पैदा होते हैं. हर दिशा में लगा शीशा शुभ परिणाम नहीं देता है. कुछ जगहों पर यह धन, रिश्तों और मानसिक शांति को प्रभावित भी कर सकता है. आइए जानते हैं कि घर में शीशा लगाने की सही दिशा क्या है.
Vastu Tips: क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि शीशा भी वास्तु दोष का कारण बन सकता है. जी हां, घर में शीशा लगाने को लेकर लोगों के बीच कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं. आमतौर पर माना जाता है कि पलंग के ठीक सामने लगा शीशा घर में अशुभता लाता है. जबकि, दूसरी तरफ कुछ लोग यह मान लेते हैं कि किसी भी कमरे की उत्तर दिशा में शीशा होना हमेशा शुभ माना जाता है. वास्तु की दृष्टि से देखें तो दोनों ही मान्यताएं पूरी तरह सही नहीं हैं. शीशा न तो हर जगह नुकसान देता है और न ही हर दिशा में शुभ परिणाम देता है. इसका प्रभाव पूरी तरह सही दिशा और स्थान पर निर्भर करता है.
शीशे की सही दिशा
वास्तु शास्त्र में शीशा जल तत्व का प्रतीक माना गया है, इसलिए इसे अग्नि और पृथ्वी तत्व वाली जगहों पर लगाने से बचना चाहिए. यही कारण है कि दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा को छोड़कर उत्तर, पूर्व और पश्चिम दिशा में शीशा लगाना शुभ माना गया है. कई लोग इस गलतफहमी में रहते हैं कि किसी भी दिशा में बने कमरे की उत्तर दीवार पर शीशा लगाने से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे, जबकि यह पूरी तरह भ्रम है. दिशा का निर्धारण हमेशा पूरे घर की मुख्य दिशाओं से होता है, न कि किसी एक कमरे की स्थिति से.
इस आकार का होना चाहिए शीशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, जहां तक शीशे के आकार की बात है, तो चार फुट से छोटा मिरर (लगभग 1–2 फीट) किसी भी दिशा में लगाया जा सकता है. यहां तक कि दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में भी. ध्यान सिर्फ इतना रखना होता है कि इन दो दिशाओं में ऐसा बड़ा शीशा न हो जिसमें पूरी आकृति साफ दिखाई दे. माना जाता है कि दक्षिण दिशा में लगा बड़ा शीशा कैश फ्लो और धन की स्थिरता में रुकावट पैदा करता है, जबकि दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगा बड़ा मिरर रिश्तों, परिवारिक सामंजस्य और दांपत्य जीवन में तनाव बढ़ा सकता है.
शीशा बन सकता है दुर्भाग्य का कारण

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