
Lebanon Blasts: वॉकी टॉकी बनाने वाली जापानी कंपनी बोली- हमने तो 2014 में ही प्रोडक्शन बंद कर दिया था
AajTak
लेबनान में जिन वॉकी-टॉकी में धमाके हुए उन पर मेड इन जापान लिखा हुआ था. फुटेज में जापानी कंपनी आईकॉम के ब्रांड वाले नष्ट हुए डिवाइस दिखाई दिए. इस पर जापानी कंपनी ने कहा कि इस उपकरण को लगभग एक दशक पहले (2014) बनाना बंद कर दिया था.
लेबनान की राजधानी बेरूत में पेजर के बाद वॉकी-टॉकी और सोलर पैनल में हुए धमाकों के बार लोग डर और खौफ के साये में जी रहे हैं. जब भी यहां फोन की घंटी बजती है तो लोग खौफ में आ जाते हैं कि कहीं कॉल रिसीव करते ही मोबाइल ब्लास्ट ना हो जाए. मंगलवार को लेबनान में सीरियल पेजर ब्लास्ट में जहां 12 लोगों की मौत हो गई तो वहीं बुधवार को राजधानी बेरूत में वॉकी-टॉकी और सोलर पैनल में सीरियल ब्लास्ट 20 लोगों की मौत की खबर है. दोनों धमाकों में हजारों लोग घायल भी हुए हैं जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है.
जिन वॉकी टॉकी में धमाके हुए हैं, उस पर ICOM V82 लिखा है जो कि जापान में बनती हैं. इसे बनाने वाली कंपनी आईकॉम इंक ने कहा कि वे इस दावे की जांच कर रहे हैं. हालांकि जापानी फर्म ने कहा कि लेबनान विस्फोटों में इस्तेमाल किए गए उपकरणों का उत्पादन 2014 में ही बंद कर दिया गया था.
जापानी कंपनी की सफाई
जापानी रेडियो उपकरण निर्माता आईकॉम इंक ने कहा कि वह इस बात की पुष्टि नहीं कर सकता कि लेबनान में विस्फोटों में कथित तौर पर शामिल उपकरण उसकी कंपनी द्वारा भेजा गया था या नहीं. आईकॉम के अनुसार, इस वॉकी टॉकी को लगभग एक दशक पहले (2014) बनाना बंद कर दिया था जिसमें बैटरियों की आवश्यकता होती है. कंपनी फिलहाल रिपोर्ट्स की जांच कर रही है.
यह भी पढ़ें: पहले पेजर, अब वॉकी-टॉकी... हिज्बुल्लाह पर सबसे तीखा प्रहार, लगातार दूसरे दिन सीरियल धमाकों से दहला लेबनान
टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनी ने एक बयान में कहा, "दुनिया भर के मीडिया में ऐसी खबरें आई हैं कि लेबनान में आईकॉम लोगो वाले दो-तरफ़ा रेडियो उपकरणों (वॉकी टॉकी) में विस्फोट हुआ है. हम वर्तमान में इस मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रहे हैं. हम इस बारे में अपडेट जारी करेंगे जो हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध होगा." विस्फोटित वॉकी-टॉकी की तस्वीरों में "आईकॉम" और "मेड इन जापान" के लेबल दिखाई दिए.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के दबाव के खिलाफ डेनमार्क के कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें कोपेनहेगन में अमेरिकी दूतावास तक मार्च भी शामिल रहा. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड मुद्दे पर दबाव बढ़ाते हुए डेनमार्क समेत आठ यूरोपीय देशों से आने वाले सामान पर 1 फरवरी से 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है.

यूक्रेन पर रूस ने एक ही रात में 200 से अधिक स्ट्राइक ड्रोन दागकर भीषण हमला किया है. इस हमले में सुमी, खार्किव, नीप्रो और ओडेसा सहित कई इलाके निशाने पर रहे, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए हैं. राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इन हमलों के बीच देश की आंतरिक मजबूती और मरम्मत दलों के काम की सराहना की है.

गाजा पुनर्विकास के लिए ट्रंप की शांति योजना के तहत 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों का ऐलान कर दिया गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद उसके अध्यक्ष होंगे. इधर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा संघर्ष समाप्त करने की व्यापक योजना के तहत गाजा के पुनर्विकास के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' में नामित किया गया है. देखें अमेरिकी से जुड़ी बड़ी खबरें.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे. प्रधानमंत्री की अगुवाई में US कॉन्सुलेट तक मार्च निकाला गया. जबकि डेनमार्क और यूरोप ने NATO मौजूदगी बढ़ाने का संकेत दिया है. ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने से जुड़े बयान दिए हैं, जिसके बाद लोगों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है.

अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.







