
'अब टाइम आ गया है...', ग्रीनलैंड पर ट्रंप ने दी आखिरी वॉर्निंग, रूस को भी लपेटा
AajTak
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क पर दबाव बढ़ा दिया है. रूस के खतरे का हवाला देते हुए ट्रंप ने डेनमार्क समेत सात नाटो देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है. यूरोप ने इसे ब्लैकमेल बताया है, जबकि ट्रंप का कहना है कि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपना रुख और सख्त कर लिया है. ट्रंप का कहना है कि डेनमार्क बीते 20 वर्षों से ग्रीनलैंड में रूस के बढ़ते प्रभाव को रोकने में नाकाम रहा है. इसी आधार पर उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की जरूरत बताई है.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि नाटो ने डेनमार्क को लंबे समय से रूसी खतरे को हटाने की चेतावनी दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने लिखा, "अब समय आ गया है, और यह होकर रहेगा." इस बयान को ग्रीनलैंड पर सीधे दबाव के रूप में देखा जा रहा है.
यह भी पढ़ें: 85 साल का रिलेशन, मिलिट्री बेस और न्यूक्लियर रिसर्च... ग्रीनलैंड को यूं ही नहीं कब्जाना चाहता अमेरिका
इससे पहले ट्रंप ने ऐलान किया था कि 1 फरवरी 2026 से डेनमार्क समेत सात नाटो सहयोगी देशों - नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा. ट्रंप ने कहा कि 1 जून से यह टैरिफ बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा और तब तक जारी रहेगा, जब तक "ग्रीनलैंड की पूरी और स्थायी हल" नहीं हो जाता.
अमेरिका को 'गोल्डन डोम' के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत
ट्रंप का तर्क है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए "बहुत जरूरी" है. उनका कहना है कि प्रस्तावित 'गोल्डन डोम' मिसाइल डिफेंस सिस्टम के निर्माण के लिए ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति अहम है.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.








