
क्या सच में प्रदर्शनकारियों को 'सजा-ए-मौत' नहीं देगा ईरान... खामेनेई शासन की चाल में फंस गए ट्रंप!
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ईरानी शासन प्रदर्शनकारियों को फांसी के आरोपों से इनकार कर रही है, लेकिन स्थानीय मीडिया का मानना है कि प्रदर्शनकारियों को कानूनी शब्दों में
ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच ईरानी शासन के हालिया बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक तरह की राहत का माहौल बनाया है, लेकिन स्थानीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों के आकलन के मुताबिक यह राहत भ्रामक हो सकती है. ईरान के एक स्थानीय मीडिया संस्थान की मानें तो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका बदला गया है, न कि सख्ती खत्म की गई है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में अमेरिकी न्यूज चैनल से कहा था कि तेहरान की प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की कोई योजना नहीं है. वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया कि उन्हें "पुख्ता सूत्रों" से जानकारी मिली है कि प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रोक दी गई हैं.
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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी यह दोहराया कि ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान ने एक दिन में होने वाली 800 फांसियों को रोक दिया. पहली नजर में अगर देखा जाए तो ईरानी शासन की तरफ से आया ये बयान बड़ी राहत देने वाली बात लगती है, लेकिन ईरानी पत्रकार पिछले रिकॉर्ड्स को देखकर बताते हैं कि ये तस्वीर कुछ और बयां करती है.
ईरान में प्रदर्शन के लिए मौत की सजा का प्रावधान नहीं
ईरान में प्रदर्शनों की वजह से मौत की सजा का प्रावधान नहीं है. मसलन, शासन की तरफ से उन प्रदर्शनों को अवैध जरूर कहा जाता है लेकिन उसके लिए किसी को फांसी नहीं दी जाती, बल्कि जेल की सजा दी जाती है. असल खेल शब्दों का है, प्रदर्शनों में विरोध की परिभाषाओं का है, जहां ईरानी प्रशासन प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग कैटगरी में रखते हैं.

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