
चीन बना रहा दुनिया का पहला हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट, 2032 तक हो जाएगा चालू
AajTak
पूर्वी चीन के जिआंगसू प्रांत के लियानयुंगांग में शुवेई न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण की शुरुआत हो गई है, जो चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना के तहत पहली परमाणु परियोजना है. यह दुनिया की पहली परियोजना है जिसमें हुआलोंग वन और हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड रिएक्टर को एक साथ जोड़ा गया है, जिससे बिजली के साथ हाई-क्वालिटी स्टीम भी तैयार होगी.
पूर्वी चीन में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण की शुरुआत हो गई है. चीन के 15वें पंचवर्षीय योजना काल (2026–2030) के तहत शुरू होने वाली यह पहली परमाणु परियोजना है. जिआंगसू प्रांत के लियानयुंगांग शहर में स्थित शुवेई न्यूक्लियर पावर प्लांट का निर्माण शुक्रवार से शुरू हुआ.
यह दुनिया की पहली ऐसी परियोजना है, जिसमें हुआलोंग वन प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर और हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड रिएक्टर को एक साथ जोड़ा गया है. यह संयंत्र न सिर्फ बिजली पैदा करेगा, बल्कि हाई-क्वालिटी की स्टीम भी उपलब्ध कराएगा.
दो चरणों में होगा निर्माण
प्लांट के मुख्य निर्माण कार्य की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जिसमें पहला बड़ा काम नंबर-1 परमाणु यूनिट के लिए कंक्रीट डालने का रहा. इस परियोजना का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा. फिलहाल पहले चरण का काम शुरू हुआ है, जिसमें दो हुआलोंग वन यूनिट और एक हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड रिएक्टर यूनिट बनाई जाएंगी.
परियोजना में लगाए जाने वाले दो हुआलोंग वन यूनिट चीन की पूरी तरह स्वदेशी थर्ड जेनेरेशन की परमाणु तकनीक पर आधारित हैं, जबकि हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड रिएक्टर फोर्थ जेनेरेशन की परमाणु तकनीक का इस्तेमाल करता है.
घटेगी हर साल 72.6 लाख टन कोयले की खपत

अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.








