
Lakshadweep: कभी सिर्फ एक ग्रेजुएट से थी पहचान, अब बदल गई है सूरत, जानिए- कैसे
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भारत के केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बवाल मचा हुआ है. पीएम मोदी द्वारा लक्षद्वीप को प्रमोट करने पर टूरिस्ट प्लेस मालदीव्स के मंत्रियों ने आपत्तिजनक टिप्पड़ियां कर हैं, जिसको लेकर ट्विटर पर #boycottmaldives ट्रेंड कर रहा है. सिर्फ खूबसूरती ही नहीं आज हम शिक्षा क्षेत्र में लक्षद्वीप के विकास को लेकर बात करेंगे. आजादी के कई सालों बाद भी यहां सिर्फ एक ही छात्र ऐसा था जिसने ग्रेजुएशन की था लेकिन आज कई हैं, तो आइए जानते हैं कि किस तरह लक्षद्वीप को इस मुकाम तक पहुंचाया गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में भारत के केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के दौरे पर थे. यहां की खूबसूरती बताते हुए उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर कई तस्वीरें पोस्ट की, लेकिन उनके इस ट्वीट से मालदीव सरकार के मंत्रियों में खलबली मच गई. पीएम मोदी की लक्षद्वीप यात्रा को लेकर मालदीव सरकार की मंत्री मरियम शिउना और दूसरे नेताओं द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयानों के बाद दोनों देशों मे हंगामा मचा हुआ है.अब हर कोई लक्षद्वीप के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहता है. आइए हम आपको यहां का वो पहलू बताते हैं जो आजादी के बाद यहां शिक्षा के क्षेत्र की पूरी यात्रा बयां करता है.
1 नवंबर 1956 को लक्षद्वीप बना था भारत का केंद्र शासित प्रदेश
लक्षद्वीप भारत देश के केंद्र शासित प्रदेशों में से एक है. सिर्फ खूबसूरती ही नहीं, ब्लिक शिक्षा के क्षेत्र में उन्नत प्रगति के लिए भी इस टापू को जाना जाता है. साल 1956, 1 नवंबर के दिन इसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मला था, तबसे से लेकर अबतक यानी कि पिछले 67 सालों में इस टापू पर काफी कुछ बदल चुका है. आपको जानकर हैरानी होगी कि बीते सालों में लक्षद्वीप ने सारक्षता दर (Literacy Rate) 15 प्रतिशत से 84 प्रतिशत तक पहुंचा गया है. इस विकास का श्रेय यहां की सरकार और लोगों को जाता है. आइए अपने इस खूबसूरत टापू के शिक्षा के विकास पर एक नजर मारते हैं.
शुरुआत में लक्षद्वीप में पढ़ाई जाती थी सिर्फ कुरान
लक्षद्वीप की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, काफी सालों पहले तक लक्षद्वीप के करीब 36 के 36 द्वीपों में मस्जिदों से जुड़े स्कूलों में कुरान पढ़ाई जाती थी. मदरसों में मलयालम भाषा अरबी लिपि में पढ़ाई जाती थी, लेकिन इस भाषा को कुछ ही लोग पढ़ और लिख सकते थे. जब यहां ब्रिटिश लोगों ने अपना शासन शुरू किया तब यहां शिक्षा को बहुत पिछड़ा हुआ माना जाता था. ब्रिटिश लोगों के यहां आने के बाद भी किसी ने भी स्कूल खोलने का कोई प्रयास नहीं किया और ना ही युवाओं की शिक्षा की ओर ध्यान दिया गया.
15 जनवरी 1904 में खुला था पहला सरकारी स्कूल

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