
Israel Gaza war: 67 ऐतिहासिक शब्दों वाली वो चिट्ठी जो बनी इजरायल राष्ट्र बनने का आधार! Balfour Declaration की कहानी
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बॉल्फोर घोषणापत्र वो दस्तावेज है जिसने आधुनिक इजरायली स्टेट की स्थापना का आधार रख दिया. इस घोषणापत्र को जारी करने के साथ ही ब्रिटेन ने इजरायल की स्थापना को अपना कानूनी जिम्मेदारी समझा और इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया. 1917 से शुरू हुआ ये सिलसिला 1948 में अपने मुकाम पर पहुंचा.
Israel Palestine conflict: कैसे बनता है एक देश? दुनिया के मानचित्र पर लकीरें कैसे खीचीं जाती हैं? कैसे सालों-साल तक एक राष्ट्र का अंकुरण दिल-दिमाग में होता है फिर उसे जमीन पर उतारकर नैरेटिव और प्रोपगैंडा के खाद-पानी से सींचा जाता है. तब जन्मता है एक शिशु देश. इजरायल के बनने की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. इस इजरायल के बनने में एक बेहद ही अहम और कालजयी दस्तावेज है A-4 साइज के मात्र एक पन्ने पर लिखी गई एक चिट्ठी.
106 साल पहले लिखी गई इस चिट्ठी के 67 शब्द ऐसे हैं जो आधुनिक इजरायल राष्ट्र की स्थापना का आधार बन गए. चिट्ठी के मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले 1917 में दुनिया के बेहतरीन राजनीतिज्ञों ने इन 67 शब्दों में से हर एक के अर्थ और उसमें छिपे संदेश पर कई कई बार विचार किया फिर आखिरी ड्राफ्ट लेकर आए. ये चिट्ठी लिखी गई थी ब्रिटिश संसद के कुछ टॉप कूटनीतिज्ञों द्वारा.
इस पत्र को दुनिया अपने-अपने नजरिये से देखती है. दिल्ली स्थित इजरायल का दूतावास इस पत्र के 67 शब्दों को यहूदी राष्ट्र की स्थापना की दिशा में वैश्विक ऐलान मानता है. इजरायल का दूतावास अपने वेबसाइट पर लिखता है, "ये घोषणा इस तथ्य को स्वीकार करती है कि यहूदी लोग इजराइल की भूमि के मूल निवासी हैं और सैकड़ों सालों से उनकी वहां निरंतर उपस्थिति रही है."
वहीं अरबी राष्ट्रवाद ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा जारी इस पत्र को अपने साथ छलावा और धोखा मानता है. अरब का तर्क है कि इस पत्र के जरिए अंग्रेजों ने फिलीस्तीन की उस पर जमीन पर एक यहूदी राष्ट्र बनाने का वादा किया जहां की 90 फीसदी आबादी मुस्लिम और स्थानीय ईसाइयों की थी.
अरबों का कहना है कि 1948 में जब फिलीस्तीन की जमीन पर इजरायल वजूद में आया तो ये स्थानीय फिलीस्तिनियों के लिए नक्बा (NAKBA) मोमेंट लेकर आया. अरबी में नक्बा का मतलब 'महाविपत्ति' या 'तबाही' होता है. दरअसल इजरायल बनने के साथ ही फिलीस्तीन में भीषण टकराव हुआ और यहां से पूरे अरब में 5 लाख फिलीस्तिनियों का पलायन हुआ. इसे नक्बा के नाम से जाना जाता है.
ओटोमन साम्राज्य के पतन के साथ मुखर हुआ फिलीस्तीन का सवाल

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