
क्या गाजा पट्टी की आड़ में UN को किनारे करने की तैयारी में हैं Trump, क्यों 'पीस बोर्ड' पर मचा बवाल?
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पिछले साल के आखिरी महीनों में डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में चल रही हमास और इजरायल की जंग को खत्म करने के लिए प्लान दिया. बीस-सूत्रीय योजना में बोर्ड ऑफ पीस बनाने का भी प्रस्ताव था. ये बोर्ड गाजा पट्टी को दोबारा बसाने और वहां सरकार बनाने पर काम करेगा. इसकी स्थायी सदस्यता के लिए मोटी रकम चुकानी होगी, वो भी नकद में.
आतंकी संगठन हमास ने दो साल पहले इजरायली सीमा पर अटैक करते हुए हजारों जानें ले लीं और सैकड़ों लोगों को बंधक बना लिया. इजरायल ने भी पलटवार किया. इस दौरान गाजा पट्टी लड़ाई का मैदान बनी रही. युद्ध में अस्सी फीसदी इलाका तबाह हो गया. पिछले साल डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में जंग रुकी और अब ट्रंप के कहने पर एक बोर्ड ऑफ पीस बन रहा है. गाजा की दोबारा बसाहट पर काम करने वाले इस बोर्ड में भारत को भी सदस्यता का न्योता मिला है, लेकिन दिलचस्प ये है कि इसकी परमानेंट मेंबरशिप के लिए एक बिलियन डॉलर यानी लगभग आठ हजार करोड़ रुपए देने होंगे.
यहां कई सवाल आते हैं
- बोर्ड ऑफ पीस क्या है और कैसे काम करेगा.
- क्या बोर्ड सरकार बनने के बाद भी गाजा पर नजर रखेगा.
- क्या इसके सदस्य देश अपनी सेनाएं गाजा पट्टी में रखेंगे.
- इसकी परमानेंट मेंबरशिप के क्या मायने हैं और क्यों इसके लिए अच्छी-खासी रकम देनी होगी.

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