
IPC Section 103: संपत्ति की निजी सुरक्षा के अधिकार का विस्तार बताती है धारा 103
AajTak
आईपीसी की धारा 103 (IPC Section 102) यह बताती है कि संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु के कारण तक कब होता है?? आइए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 103 इसके बारे में क्या बताती है?
Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता में आत्मरक्षा (Self defense) के प्रावधान अलग-अलग हालात के मुताबिक परिभाषित (Define) किए गए हैं. जिन्हें आईपीसी की धारा 96 (Sction 96) से लेकर धारा 106 (Section 106) तक दर्ज किया गया है. इसी तरह से आईपीसी की धारा 103 (IPC Section 103) यह बताती है कि संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु के कारण तक कब होता है? आइए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 103 इसके बारे में क्या बताती है? आईपीसी की धारा 103 (Indian Penal Code Section 103) भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 103 (Section 103) में बताया गया है कि संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु के कारण तक कब होता है? IPC की धारा 103 के मुताबिक, संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार (Extension of authority) धारा 99 (IPC Section 99) में वर्णित निर्बन्धनों के अध्यधीन (Subject to the stated restrictions) दोषकर्ता की मृत्यु या अन्य अपहानि स्वेच्छया (Voluntarily causing death or other harm to the offender) कारित करने तक का है, यदि वह अपराध (Offence) जिसके किए जाने के, या किए जाने के प्रयत्न के कारण उस अधिकार के प्रयोग (Exercise of authority) का अवसर आता है, एतस्मिनपश्चात् प्रगणित भांतियों (Hereinafter-calculated methods) में से किसी भी भांति का है, अर्थात:–
पहला- लूट (Robbery)
दूसरा- रात्रौ गृह-भेदन (House-breaking by night)
तीसरा- अग्नि द्वारा रिष्टि (Mischief by fire),जो किसी ऐसे निर्माण, तंबू या जलयान (Building, tent or vessel) को की गई है, जो मानव आवास (Human dwelling) के रूप में या संपत्ति की अभिरक्षा (Custody of property) के स्थान के रूप में उपयोग में लाया जाता है.
चौथा- चोरी, रिष्टि या गृह-अतिचार (Theft, mischief or house-trespass) जो ऐसी परिस्थितियों में किया गया है, जिनसे युक्तियुक्ति रूप (rational form) से यह आशंका कारित हो कि यदि प्राइवेट प्रतिरक्षा के ऐसे अधिकार का प्रयोग (Exercise of authority) न किया गया तो परिणाम मृत्यु या घोर उपहति (Death or grievous hurt) होगा.
साधारण भाषा में कहें तो इसे ऐसे समझ सकते हैं कि आईपीसी की धारा 103 के मुताबिक -

जम्मू-कश्मीर के किश्तवार जिले में ऑपरेशन त्राशी-1 के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकियों की छिपने की जगह का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है. यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तहत किया गया जिसमें आतंकियों को पकड़ने और उन्हें मार गिराने के उद्देश्य से सुरक्षा बल सक्रिय थे. इस अभियान में आतंकियों के छिपने के स्थान का पता चलने से इलाके में सुरक्षा अभी और सख्त हो गई है.

प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद के दावे पर नोटिस जारी किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2022 के आदेशों का हवाला दिया गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि नोटिस सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है और उन्होंने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग अपराध नहीं बनता।

भारतीय जनता पार्टी ने नितिन नबीन को अपना 12वां राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है. सोमवार को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंच पर उन्हें निर्वाचन पत्र सौंपा गया. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह समेत पार्टी के प्रमुख नेता मौजूद थे. पीएम मोदी ने नितिन नबीन को बधाई देते हुए कहा कि वे उनके बॉस हैं और अब वे सभी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. देखें PM मोदी के संबोधन की बड़ी बातें.

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का आधा टर्म नवंबर 2025 में पूरा हो चुका है, जिससे स्पेकुलेशन बढ़ा. होम मिनिस्टर जी परमेश्वर भी फ्रे में हैं, लेकिन मुख्य जंग सिद्धारमैया-डीके के बीच है. पार्टी वर्कर्स में कन्फ्यूजन है, लेकिन हाई कमांड का फोकस यूनिटी पर है. क्या 29 जनवरी का समन टसल खत्म करेगा या नया ड्रामा शुरू होगा? देखना बाकी है.







