
Imran Khan की Taliban के लिए फंडिंग की वकालत, IMF ने दिया जोर का झटका
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इस वक्त दुनिया के 195 मुल्कों में तालिबान को लेकर चर्चा चल रही है, तालिबान के इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान को किस तरह से देखना चाहिए. ताजिकिसतान की राजधानी दुशांबे में भारत, पाकिस्तान, चीन समेत आठ देशों की सदस्यता वाले शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है. यहां भी पाकिस्तान और इमरान खान पूरी तरह से एक्सपोज़ हो गए, जैसे ही चर्चा शुरु हूई, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने तुरंत तालिबान की तरफदारी शुरु कर दी और इमरान खान ने कहा कि दुनिया को अफगानिस्तान की मदद करनी होगी. साथ ही इमरान खान ने ये भी क्लीयर कर दिया कि इस्लामाबाद की तरफ से अफ़गानिस्तान की मदद की जाती रहेगी. इससे पहले भी इमरान खान खुलकर तालिबान का समर्थन कर चुके हैं और अब शंघाई कॉपरेशन ऑर्गनाइजेशन की 20वीं बैठक में सबसे पहले इमरान खान तालिबान पर बोल पड़े और कह दिया कि इस वक्त अफगानिस्तान की सरकार विदेशी मदद पर निर्भर है. देखें ये वीडियो.

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.









