
Holi 2021: 150-200 साल से बेरंग पड़े ये गांव, मौत के डर से लोग नहीं मनाते होली
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क्या आप जानते हैं भारत में कई गांव ऐसे भी जहां लंबे समय से होली मनाने का कोई रिवाज नहीं है. आइए आपको बताते हैं कि भारत के कुछ गांवों में क्यों और कब होली मनाने की परंपरा समाप्त हुई है.
होली भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है. रंग, गुलाल, स्नेह और भक्ति के इस त्योहार को मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में कई गांव ऐसे भी हैं, जहां लंबे समय से होली मनाने का कोई रिवाज नहीं है. आइए आपको भारत के कुछ ऐसे ही गांवों के बारे में बताते हैं. रूद्रप्रयाग (उत्तराखंड)- उत्तरखांड के रूद्रप्रयाग जिले में कुरझां और क्विली नाम के दो गांव हैं, जहां करीब 150 साल से होली का त्योहार नहीं मनाया गया है. यहां के स्थानीय निवासियों की मान्यता है कि इलाके की प्रमुख देवी त्रिपुर सुंदरी को शोर-शराबा बिल्कुल पसंद नहीं है. इसलिए इन गांवों में लोग होली मनाने से बचते हैं. उत्तराखंड में रूद्रप्रयाग उस जगह का नाम है, जहां अलकनंदा और मंदाकिनी नदी का संगम होता है. श्रद्धालु यहां कोटेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करने जरूर आते हैं. ऐसी मान्यताएं हैं कि भस्मासुर नामक राक्षस की नजरों से बचने के लिए भगवान शिव ने यहीं एक चमत्कारी गुफा में खुद को छिपा लिया था.More Related News













