
Iran Israel US War: ईरान का 130 साल पुराना हिंदू मंदिर, युद्ध के बीच सुर्खियों में आया
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ईरान में हिंदुओं की संख्या बहुत कम है. लेकिन होर्मुज के पास बंदर अब्बास में भगवान विष्णु को समर्पित करीब 130 साल पुराना एक हिंदू मंदिर स्थित है. कहा जाता है कि इस मंदिर को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में काम करने वाले भारतीयों ने बनाया था.
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग ने पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा रखी है. दोनों तरफ से लगातार हमले जारी हैं. आसमान से गिरती मिसाइलों ने दोनों तरफ भारी नुकसान पहुंचाया है. अब तक कई इजरायली और अमेरिकी लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई भी इस युद्ध में मारे जा चुके हैं. युद्ध के चलते ईरान में रहने वाले हिंदुओं की भी बड़ी चर्चा हो रही है. ईरान का एक हिंदू मंदिर भी सुर्खियों में आ गया है.
130 साल पुराना हिंदू मंदिरईरान में हिंदुओं की तादाद बहुत कम है. प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, साल 2010 में करीब 20 हजार हिंदू ईरान में रहते थे. ईरान के होर्मुज से सटे बंदर अब्बास में हिंदुओं का एक लोकप्रिय मंदिर भी है. भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर को करीब 130 वर्ष पुराना बताया जाता है. इस मंदिर का पुनर्निर्माण साल 1982 में हुआ था. इसे मोहम्मद हसन खान साद-अल-मलेक ने बनवाया था. कहा जाता है कि इस मंदिर को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में काम करने वाले भारतीयों ने बनाया था.
विष्णु मंदिर की खूबियां भगवान विष्णु के इस मंदिर को बहुत भव्य बताया जाता है. मंदिर के अंदर एक चौरस कमरा है. ऊपर एक बड़ा गुंबद है. मंदिर का निर्माण मूंगा पत्थर, मोर्टार, मिट्टी और लुई चाक से किया गया है. इस मंदिर में भगवान कृष्ण के भी कुछ चित्र हैं. शास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु जी का आठवां और पूर्ण अवतार बताया गया है.
चाबहार का मंदिर ईरान में चाबहार नाम की जगह पर भी एक हिंदू मंदिर है. इसे एक मंदिर या मूर्तिघर माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि गुजरात से आए कुछ हिंदू कारोबारियों ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था. यह मंदिर 19वीं-20वीं शताब्दी के आस-पास बना था. इसका निर्माण मूंगा पत्थर और लुई चाक से किया गया है.
तेहरान का प्रसिद्ध गुरुद्वारा ईरान की राजधानी तेहरान में भाई गंगा सिंह सभा नाम का एक प्रसिद्ध गुरुद्वारा भी है. इसका निर्माण साल 1941 में करवाया गया था. ईरान में इसे मस्जिद-ए-हिंडन के नाम से भी जाना जाता है. कहते हैं कि हर शुक्रवार के दिन यहां लंगर का आयोजन किया जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस गुरुद्वारे का दौरा कर चुके हैं. बता दें कि ईरान में सिखों की संख्या बहुत कम है.

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