
'हम पर भरोसा नहीं...', रूस और भारत की करीबी पर बोलीं निक्की हेली
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पूर्व डिप्लोमैट रिपब्लिकन पार्टी से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की रेस में शामिल निक्की हेली ने कहा है कि भारत रूस के साथ नहीं, बल्कि अमेरिका के साथ भागीदार बनना चाहता है लेकिन उसे लीडर के तौर पर अमेरिका पर भरोसा नहीं है. भारत अमेरिका को अभी कमजोर कड़ी के रूप में देख रहा है.
अमेरिका में इस साल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं. इस चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां और बयानबाजी भी तेज हो गई हैं. पूर्व डिप्लोमैट और रिपब्लिकन पार्टी से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की रेस में शामिल निक्की हेली ने इसी बीच एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि भारत को अमेरिकी नेतृत्व पर भरोसा नहीं है. भारत समझदारी से काम लेते हुए रूस के साथ बना हुआ है. वे अभी देख रहे हैं कि हम कमजोर हैं.
बुधवार को फॉक्स बिजनेस न्यूज को दिए इंटरव्यू में निक्की हेली ने कहा, "समस्या यह है कि जीत के लिए भारत को हम पर भरोसा नहीं है. नेतृत्वकर्ता के रूप में उन्हें हम पर भरोसा नहीं है. वे अभी हमें कमजोर कड़ी के रूप में देख रहे हैं. भारत रूस के साथ नहीं, बल्कि अमेरिका के साथ भागीदार बनना चाहता है लेकिन उसे लीडर के तौर पर अमेरिका पर भरोसा नहीं है.
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार में राजदूत रह चुकी हेली ने आगे कहा कि हमने भारत के साथ काम किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात भी की है. वर्तमान वैश्विक स्थिति में भारत ने स्मार्ट प्ले किया है और वह रूस के करीब रहा.
भारत ने हमेशा समझदारी दिखाई हैः हेली
भारत को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "मैंने भारत के साथ भी काम किया है. मैंने प्रधानमंत्री मोदी से बात भी की है. भारत हमारे साथ भागीदार बनना चाहता है. वह रूस के साथ भागीदार नहीं बनना चाहता है. लेकिन समस्या यह है कि भारत को जीत के लिए हम पर भरोसा नहीं है. भारत ने हमेशा समझदारी दिखाई है. इस समय भी वह समझदारी से काम ले रहा है और रूस के करीब है. क्योंकि रूस से ही उसे अभी बहुत सारे सैन्य उपकरण मिल रहे हैं."
उन्होंने आगे कहा, "जब हम फिर से नेतृत्व करना शुरू करते हैं, जब हम अपनी कमजोरी दूर करना शुरू करते हैं तभी हमारे दोस्त भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इजरायल, जापान, दक्षिण कोरिया भी ऐसा करना चाहते हैं. जापान ने चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए खुद को अरबों डॉलर की प्रोत्साहन राशि दी है. उसी तरह भारत ने भी चीन पर से निर्भरता कम करने के लिए खुद को अरबों डॉलर का प्रोत्साहन दिया है."

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