
'हम कोई विदेशी नहीं बल्कि भारतीय धर्म हैं': ईसाई धर्मगुरुओं की क्या है चिंता?
BBC
द कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ़्रेंस ऑफ़ इंडिया ने उन धर्मांतरण-विरोधी क़ानूनों को रद्द करने की मांग की है, जो संविधान की धार्मिक स्वतंत्रता के अनुरूप नहीं हैं.
द कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ़्रेंस ऑफ़ इंडिया (सीबीसीआई) ने उन धर्मांतरण-विरोधी क़ानूनों को रद्द करने की मांग की है, जो संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के अनुरूप नहीं हैं.
बता दें कि पिछले हफ़्ते ही सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण-विरोधी क़ानूनों पर रोक लगाने की मांग वाली एक याचिका पर दर्जनभर राज्यों और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था.
यह भी अहम था कि सीबीसीआई ने अपना नया अध्यक्ष हैदराबाद के कार्डिनल एंथनी पूला को चुना.
वह भारत के पहले दलित हैं जिन्हें कार्डिनल का पद मिला और अब वह इसी प्रतिष्ठित निकाय के अध्यक्ष भी बने हैं.
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बेंगलुरु में आयोजित सीबीसीआई की सप्ताहभर चली 37वीं आम बैठक के अंत में संगठन का यह स्टैंड सामने आया. इस सम्मेलन का विषय था- 'विश्वास और राष्ट्र: भारत के संवैधानिक मूल्यों के प्रति चर्च की प्रतिबद्धता'.
बता दें कि लैटिन, सिरो-मलाबार और सिरो-मलनकारा संप्रदायों के क़रीब 170 डाओसिस सीबीसीआई का हिस्सा हैं.













