
पैसा, ताक़त, रसूख़ और यौन हिंसा के मर्दाना तंत्र का नाम है एपस्टीन फ़ाइल्स: ब्लॉग
BBC
जेफ़री एपस्टीन फ़ाइल्स मर्दाना सत्ता संरचना पर सवाल खड़ा करती हैं और यह पितृसत्ता का उदाहरण पेश करती हैं.
बहुत मुश्किल है, ख़ुद के साथ हुई यौन हिंसा के बारे में बोलना. यह तब और मुश्किल हो जाता है, जब मुलज़िम हर तरह से ताक़तवर कोई मर्द हो.
मगर मुश्किलों और ख़तरों के बाद भी ताक़तवारों के ख़िलाफ़ बोलना कितना ज़रूरी है, यह बार-बार सामने आता है. कई बार आवाज़ उठाने में काफ़ी वक़्त भी लगता है.
ऐसी कई मिसालें अपने देश में भी मिल जाएँगी. आवाज़ उठाने में देरी का यह मतलब क़तई नहीं होता कि कोई जुर्म हुआ ही नहीं है.
हाँ, इन सबके दौरान बोलने वाली बहादुर स्त्रियों को जो झेलना पड़ता है, वह बेहद तकलीफ़देह होता है. उनकी नीयत, चरित्र और चुप्पी पर सवाल उठाए जाते हैं.
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ताक़त किसी चीज़ की हो सकती है. पैसा, रसूख़, सत्ता, पद… और जब मर्द के पास ये सब ताक़त होती है तो कई इनका बेख़ौफ़ इस्तेमाल यौन उत्पीड़न और हिंसा के लिए करते हैं.
यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन और उसके दोस्तों की मंडली की भी कहानी कुछ ऐसी ही है.













