
'चिकन नेक' और असम में ज़मीन के नीचे सुरंग क्यों बना रहा है भारत?
BBC
भू-रणनीतिक लिहाज से भारत के लिए यह चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरीडोर बेहद महत्वपूर्ण है. इस कॉरिडोर की औसतन चौड़ाई महज बीस किलोमीटर है. यह बांग्लादेश से सटा है. इसके उत्तर में चीन और पश्चिम में नेपाल है.
वह पतला गलियारा जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाक़ी हिस्सों से जोड़ता है उसे 'चिकन नेक' या सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नाम से भी जाना जाता है. भारत ने अब इस इलाक़े में ज़मीन के नीचे सुरंग बना कर उसमें रेल पटरियां बिछाने की योजना लगभग तैयार कर ली है.
दूसरी ओर, सरकार ने असम में ब्रह्मपुत्र के नीचे भी एक लंबी सुरंग बनाने की योजना का अनुमोदन कर दिया है.
पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर ज़िले के तीन माइल हाट से सिलीगुड़ी होते हुए 11 किलोमीटर दूर रांगापानी तक क़रीब 36 किलोमीटर लंबी सुरंग में रेलवे की पटरियां बिछाई जाएंगी.
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया है कि परियोजना ड्राफ्ट तैयार हो गया है. लेकिन अब तक इसे अंतिम तौर पर अनुमोदन नहीं मिला है.
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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में केंद्रीय बजट पेश होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में पहली बार इस परियोजना के बारे में जानकारी दी. ऐसे में माना जा सकता है कि इस परियोजना को देर-सबेर अंतिम तौर पर मंज़ूरी मिल जाएगी.
भू-रणनीतिक लिहाज से भारत के लिए यह चिकन नेक या सिलीगुड़ी कारीडोर बेहद महत्वपूर्ण है. इस कॉरिडोर की औसतन चौड़ाई महज बीस किलोमीटर है. यह बांग्लादेश से सटा है. इसके उत्तर में चीन है और पश्चिम में नेपाल.













