
मणिपुर में बीजेपी की 'लोकप्रिय सरकार' के बहाल होने से क्यों नाराज़ है कुकी जनजाति?
BBC
पिछले 32 महीनों से हिंसक जातीय संघर्ष से जूझ रहे मणिपुर में क़रीब एक साल तक राष्ट्रपति शासन के बाद बीती 4 फ़रवरी को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में सरकार का गठन किया गया लेकिन कुकी-ज़ो समुदाय के लोग इस पर नाराज़गी क्यों जता रहे हैं?
छह फ़रवरी को मणिपुर के चुराचांदपुर शहर के 'वॉल ऑफ रिमेंबरेंस' मेमोरियल के सामने सैकड़ों युवाओं की भीड़ जमा हुई और फिर थोड़ी ही देर में तीन पुतलो में आग लगा दी गई.
चुराचांदपुर का 'वॉल ऑफ रिमेंबरेंस' मेमोरियल वो जगह है जहां साल 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा में मारे गए सभी कुकी-ज़ो लोगों की तस्वीरें लगी हैं.
इसी जगह विरोध प्रदर्शन करने जमा हुए युवाओं के हाथों में प्लेकार्ड पर "न्याय नहीं तो सरकार नहीं", "ग़द्दार हम पर शासन नहीं कर सकते", "लोकप्रिय सरकार कुकी-ज़ो के लिए मौत का जाल है" और "राष्ट्रपति शासन बहाल करो" जैसे नारे लिखे थे.
इन नारों पर ध्यान से गौर करें तो यह समझना आसान हो जाता है कि हिंसा के कारण अपने सैकड़ों लोगों को गंवा चुके कुकी-ज़ो जनजाति के लोग इतने ग़ुस्से में क्यों हैं?
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यह नाराज़गी केवल कुकी-ज़ो समुदाय से राज्य में गठन हुई सरकार में शामिल उन तीन विधायकों तक सीमित नहीं दिखती.
पिछले 32 महीनों से हिंसक जातीय संघर्ष से जूझ रहे मणिपुर में करीब एक साल तक राष्ट्रपति शासन के बाद बीती 4 फरवरी को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में सरकार का गठन किया गया है.













