
'हम अपने आसमान से हमला नहीं होने देंगे...', ईरान पर इस देश ने अमेरिका को साफ किया इनकार
AajTak
ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं, जिससे ईरान पर हमले का खतरा बढ़ गया है. इस बीच सऊदी अरब ईरान के साथ खड़ा दिख रहा है. सऊदी ने अमेरिका की मदद से इनकार कर दिया है.
ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच इस्लामिक देश पर अमेरिकी हमले का खतरा काफी बढ़ गया है. एक सैन्य अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका जल्द ही ईरान पर हमला कर सकता है. हमले की तैयारी के लिए अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने सबसे बड़े एयरबेस कतर के अल उदैद एयरबेस पर गतिविधियां बढ़ा दी हैं. अमेरिका का एक बड़ा जहाजी बेड़ा साउथ चाइना सी से मध्य-पूर्व की तरफ बढ़ रहा है. अमेरिका के इन कदमों से साफ लग रहा है कि ईरान पर हमला होने ही वाला है. ईरान ने भी अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है.
इस बीच सऊदी अरब की तरफ से एक बड़ा बयान आया है. सुन्नी मुसलमान बहुल सऊदी अरब और शिया बहुल ईरान के बीच दोस्ती-दुश्मनी का मिला-जुला रिश्ता रहा है. सालों की दुश्मनी के बाद मार्च 2023 में ही चीन की मदद से दोनों ने अपने रिश्तों को सामान्य किया है.
ईरान पर अमेरिकी हमले के बढ़ते खतरों के बीच सऊदी अरब ने इसके खिलाफ ट्रंप को वॉर्निंग भी दी थी. और अब सऊदी ने ट्रंप को एक और झटका दिया है.
सऊदी अरब मध्य-पूर्व में अमेरिका का अहम सहयोगी माना जाता है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह मानकर चल रहे होंगे कि ईरान के हमले की सूरत में सभी क्षेत्रीय देश उनकी मदद करेंगे. लेकिन सऊदी अरब ने अमेरिका के बजाए ईरान का साथ देने का फैसला किया है.
बुधवार को सऊदी अरब के वास्तविक शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के करीबी दो सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएफपी से इस संबंध में बात की है. उन्होंने कहा है कि सऊदी अरब ने इस संबंध में ईरान से बात की है. किंगडम ने ईरान से कहा है कि वो अपने एयरस्पेस या अपनी जमीन को ईरान को नुकसान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल नहीं होने देंगे.
इससे पहले सऊदी, कतर और ओमान ने ईरान के प्रति अपना समर्थन जताया था. वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों देशों ने व्हाइट हाउस को बताया कि ईरानी शासन को गिराने की कोई भी कोशिश वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर देगा और इससे नुकसान अमेरिकी अर्थव्यवस्था को ही होगा.

रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने डोनाल्ड ट्रंप की खान-पान की आदतों को लेकर खुलासा करते हुए कहा, 'यात्रा के दौरान ट्रंप केवल फास्ट फूड पर निर्भर रहते हैं, जिसे उनके साथ चलने वाले लोग 'जहर' मानते हैं.' वहीं, ट्रंप अपनी सेहत और उम्र को लेकर उठ रहे सवालों के बीच खुद को फिट बताते हैं, जबकि वे खून पतला करने के लिए एस्पिरिन की भारी खुराक और हाथों के निशान छिपाने के लिए मेकअप का इस्तेमाल करते हैं.

ईरान में करीब 2000 प्रदर्शनकारियों के मौत का आंक़डा सामने आने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है. वहीं ब्रिटिश विदेश मंत्री कूपर ने भी ईरानी राजदूत को लंदन के कार्यालय में तलब प्रदर्शनकारियों की मौत की निंदा की और उस पर सख्त प्रतिबंध लगाने की बात कही. देखें दुनिया आजतक.

थाईलैंड के सिखियो में एक बहुत ही गंभीर ट्रेन हादसा हुआ है. तेज रफ्तार से आ रही एक हाई-स्पीड पैसेंजर ट्रेन पर प्रोजेक्ट की क्रेन गिर गई, जिससे ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए. इस दुखद हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई और लगभग 80 लोग घायल हुए हैं जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है. हादसे के समय ट्रेन में करीब 200 लोग सवार थे.

ईरान में कयासों, अफवाहों और हिंसा का दौर चल रहा है. अब तक 2500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. लेकिन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की सरकार जरा भी नरमी नहीं दिखा रही है और ट्रंप को अभी भी हमले के खिलाफ धमकी दे रही है. इस बीच कई दिनों के बाद आज तेहरान में फोन लाइनें खोली गई है. इसके बाद वहां की जमीनी हालत की जानकारी लोगों को मिल रही है.

ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका ने ईरान से राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने की मांग की है. ट्रंप प्रशासन ने आठ प्रमुख राजनीतिक कैदियों के नामों का जिक्र करते हुए उनकी रिहाई पर जोर दिया है. ये राजनीतिक कैदी मानवाधिकार कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी भी शामिल हैं.

ईरान में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के चलते इरफान सुलतानी को गिरफ्तार किया गया था. 8 जनवरी को गिरफ्तारी के बाद 11 जनवरी को मुकदमे में वह मोहरेबेह दोषी पाए गए. मोहरेबेह का अर्थ है भगवान के खिलाफ युद्ध छेड़ना. इस मुकदमे में उन्हें कोई कानूनी सहायता नहीं मिली और परिवार को केवल 10 मिनट की आखिरी मुलाकात की अनुमति दी गई. इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की सरकार को चेतावनी दी है कि अगर वे प्रदर्शनकारियों को फांसी देंगे तो अमेरिका कड़ा कदम उठाएगा.







